नयी दिल्ली, 18 जून (भाषा) केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने कहा है कि सरकारी वेबसाइट सार्वजनिक प्राधिकरणों का आधिकारिक रूप से प्रतिनिधित्व करती हैं और निष्क्रिय हो चुके पोर्टल के ऑनलाइन बने रहने से नागरिक भ्रमित हो सकते हैं।
पूर्ववर्ती साइबर अपीलीय न्यायाधिकरण के लगभग एक दशक पुराने पोर्टल को बंद करने का निर्देश देते हुए सीआईसी ने यह टिप्पणी की।
सूचना आयुक्त पी. आर. रमेश ने एक आदेश में कहा कि साइबर अपीलीय न्यायाधिकरण (सीवाईएटी) का 2017 में दूरसंचार विवाद निपटान और अपीलीय न्यायाधिकरण (टीडीएसएटी) में विलय कर दिया गया था, लेकिन इसका ऑनलाइन पोर्टल अभी भी उपलब्ध है।
सीआईसी ने कहा, ‘‘एक सरकारी वेबसाइट केवल किसी सर्वर पर वेबपेज का संग्रह मात्र नहीं होती। एक आम नागरिक के लिए यह सरकार द्वारा किसी सार्वजनिक प्राधिकरण के अस्तित्व, उसकी उपलब्धता और उसकी कार्यप्रणाली का आधिकारिक रूप से प्रतिनिधित्व करती है।’’
इसने कहा कि यदि किसी सरकारी संस्था का कामकाज बंद हो चुका है या उसका विलय हो चुका है, लेकिन उसकी वेबसाइट/पोर्टल अभी भी इंटरनेट पर उपलब्ध है, तो लोग भ्रमित हो सकते हैं और ऐसा मान सकते हैं कि वह संस्था अभी भी काम कर रही है।
आयोग ने कहा कि इस तरह की स्थिति से पैदा होने वाला भ्रम न तो प्रशासन के काम को अधिक प्रभावी बनाता है और न ही जनता-केंद्रित शासन के बड़े उद्देश्य को पूरा करता है।
डिजिटल सेवाओं के सही प्रबंधन पर जोर देते हुए सीआईसी ने कहा, ‘‘डिजिटल प्रबंधन के लिए केवल ऑनलाइन मंच बनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि जब इन वेबसाइट का उपयोग न रहे, तो इन्हें समय पर बंद भी कर देना चाहिए।’’
इन चिंताओं के मद्देनजर सीआईसी ने राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) को पूर्ववर्ती साइबर अपीलीय न्यायाधिकरण के पोर्टल को सात दिन के भीतर बंद करने का निर्देश दिया।
एक आरटीआई आवेदन से संबंधित अपील के निपटारे के दौरान यह आदेश पारित किया गया। इस आवेदन को निष्क्रिय हो चुके सीवाईएटी पोर्टल के माध्यम से कथित तौर पर दायर किया गया था।
भाषा
देवेंद्र माधव
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