(27 मार्च की (दि79) खबर ‘‘भारत में 2023 में बच्चों के जन्म के समय प्रति एक लाख में से 24,700 माताओं की मौत: विश्लेषण’’ को पुन: जारी किया जा रहा है। खबर में यह बताने के लिए संशोधन किया गया है कि ‘‘2023 में बच्चों के जन्म के समय कुल 24,700 माताओं की मौत हुई’’)
नयी दिल्ली, 28 मार्च (भाषा) भारत 2023 में दक्षिण एशिया और उप-सहारा अफ्रीका के उन देशों में शामिल रहा जिनमें मातृ मृत्यु दर सबसे अधिक रही तथा देश में इस दौरान बच्चों के जन्म के समय 24,700 माताओं की मौत हुई यानी प्रति एक लाख जीवित बच्चों के जन्म पर मातृ मृत्यु दर 116 रही।
‘द लैंसेट ऑब्स्टेट्रिक्स, गायनेकोलॉजी और वुमेन्स हेल्थ जर्नल’ में प्रकाशित एक नए वैश्विक विश्लेषण में यह बात कही गई है।
अनुमान के अनुसार, पाकिस्तान में 2023 में बच्चों को जन्म देते समय 10,300 माताओं की मौत हुई, जबकि अफ्रीकी देशों इथियोपिया और नाइजीरिया में यह आंकड़ा क्रमशः 11,900 और 32,900 था।
अमेरिका स्थित वॉशिंगटन विश्वविद्यालय के ‘इंस्टिट्यूट फॉर हेल्थ मैट्रिक्स एंड एवैलुएशन’ (आईएचएमई) और वैश्विक सहयोगियों के नेतृत्व में हुए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि पिछले तीन दशकों में मातृ मृत्यु दर कम हुई है लेकिन हाल के वर्षों में गिरावट की रफ्तार धीमी रही है।
‘ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज’ (जीबीडी) 2023 शोध में 204 देशों और क्षेत्रों में 2023 तक मातृ मृत्यु दर के रुझानों का सबसे ताजा वैश्विक आकलन दिया गया है।
नवीनतम ‘सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम’ (एसआरएस) 2021-23 के अनुसार, देश में मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) प्रति एक लाख जीवित बच्चों के जन्म पर 88 है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक सूत्र ने कहा कि यह आंकड़ा सुरक्षित गर्भावस्था एवं प्रसव सुनिश्चित करने की दिशा में हुई प्रगति को दर्शाता है।
सूत्र ने कहा, ‘‘मातृ स्वास्थ्य के क्षेत्र में हमारी प्रगति को वैश्विक स्तर पर मान्यता मिली है और संयुक्त राष्ट्र मातृ मृत्यु आकलन अंतर-एजेंसी समूह (यूएन-एमएमईआईजी) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने 1990 के बाद से एमएमआर में 86 प्रतिशत की कमी हासिल की है जो वैश्विक औसत 48 प्रतिशत से कहीं अधिक है। यह उपलब्धि 2030 तक एमएमआर को 70 से नीचे लाने के सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के मानक को पूरा करने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।’’
साल 2023 में विश्व में कुल 2.4 लाख माताओं की मृत्यु हुई, जो प्रति एक लाख जीवित बच्चों के जन्म पर 190.5 माताओं की मृत्यु है। यह 1990 की तुलना में एक-तिहाई कम है जब प्रति एक लाख जीवित बच्चों के जन्म पर 321 माताओं की मौत हुई थी।
हालांकि, 204 देशों और क्षेत्रों में से 104 ने अभी तक सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) के तहत निर्धारित लक्ष्य हासिल नहीं किया है। यह लक्ष्य प्रति एक लाख जीवित बच्चों के जन्म पर मातृ मृत्यु दर को 70 से नीचे रखने का है।
एक ओर मातृ मृत्यु के प्रमुख कारण स्थानों के अनुसार भिन्न पाए गए लेकिन वैश्विक रूप से मातृ रक्तस्राव और गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप संबंधी विकारों के कारण सबसे अधिक मौतें हुईं।
शोधकर्ताओं ने कहा कि प्रसव पूर्व देखभाल, सुरक्षित प्रसव सेवाओं, आपातकालीन प्रसूति देखभाल और प्रसव के बाद जांच की बेहतर सुविधा से मातृ मृत्यु दर में काफी कमी लाई जा सकती है, खासकर उन देशों में जहां बोझ सबसे अधिक है।
इसके अलावा, कोविड-19 महामारी के शुरुआती दौर में मातृ मृत्यु दर बढ़ गई थी।
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