Parliament Debate on Naxalism: ‘माओवाद के डेडलाइन पर बड़ी डिबेट’… नक्सलवाद के खात्मे पर 31 मार्च को संसद में होगा मंथन.. ये सांसद करेंगे चर्चा की शुरुआत

Ads

Parliament Debate on Naxalism: संसद में 31 मार्च को नक्सलवाद खात्मे पर चर्चा, कई माओवादी नेता आत्मसमर्पण कर चुके हैं।

  •  
  • Publish Date - March 28, 2026 / 01:11 PM IST,
    Updated On - March 28, 2026 / 01:13 PM IST

Parliamentary Debate on Naxalism || Image- Symbolic (Canva)

HIGHLIGHTS
  • संसद में नक्सलवाद खात्मे पर बड़ी चर्चा
  • कई माओवादी नेता हथियार छोड़कर लौटे
  • छत्तीसगढ़ में माओवादी संगठन नेतृत्वहीन

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़, ओड़िशा, झारखंड, एमपी और महाराष्ट्र समेत कई अन्य राज्यों में प्रतिबंधित वामपंथी उग्रवाद यानी नक्सलवाद के खात्मे की डेडलाइन तय की थी। (Parliament Debate on Naxalism) केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था कि उनकी सरकार सशस्त्र माओवादी को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने डेडलाइन तय करते हुए बताया था कि 31 मार्च 2026 देश में नक्सलवाद का आखिरी दिन होगा।

सांसद श्रिकांत शिंदे करेंगे चर्चा की शुरुआत

वही अब इसी अहम मुद्दे पर संसद के लोकसभा में सोमवार यानी 30 मार्च को देश को नक्सलवाद से मुक्त करने के प्रयासों पर चर्चा होने वाली है। चर्चा की शुरुआत श्रिकांत शिंदे लोकसभा के नियम 193 के तहत करेंगे। इस मौके पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह समेत भाजपा के सभी संसद सदस्य और विपक्षी दल के नेता संसद में मौजूद होंगे।

बता दें कि पिछले एक वर्ष में कई माओवादी नेता हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौट चुके हैं। हाल ही में सबसे वांटेड माओवादी नेता सुकुरू और उनके चार सहयोगियों ने 25 मार्च को ओड़िशा पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया था। (Parliament Debate on Naxalism) एडीजी (एंटी-नक्सल ऑपरेशन) संजय पांडा ने बताया कि इन माओवादी नेताओं पर कुल ₹66 लाख का इनाम था। उन्होंने कुल पाँच हथियार सरेंडर किए, जिनमें एक AK-47, एक INSAS राइफल और एक सिंगल-शॉट बंदूक शामिल थी।

छत्तीसगढ़ में माओवादी नेतृत्वविहीन

संजय पांडा ने आगे कहा, “अब कंधमाल जिले में माओवादी संख्या बहुत सीमित है, केवल 8–9 लोग बचे हैं। आने वाले दिनों में हम अपने एंटी-नक्सल अभियान को और तेज करेंगे ताकि लक्ष्य तिथि तक परिणाम मिल सके। मैं शेष माओवादी नेताओं से अपील करता हूँ कि वे पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करें, और मैं उन्हें सभी surrender नीतियों का लाभ देने का आश्वासन देता हूँ।”

छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में, जो कुख्यात दंडकारण्य जंगल पट्टी का हिस्सा है और नक्सल आंदोलन का प्रमुख केंद्र माना जाता है, वांटेड नक्सली लीडर और डीकेएसजेडसी सदस्य पापा राव और 17 अन्य माओवादी कैडर ने 17 मार्च को आत्मसमर्पण कर दिया था। बता दें कि पापा राव छत्तीसगढ़ में सक्रिय नक्सलियों के सबसे बड़े और अंतिम नेता थे। उनके सरेंडर के साथ ही छत्तीसगढ़ में माओवादी नेतृत्वविहीन हो चुका है। (Parliament Debate on Naxalism) छग के गृहमंत्री विजय शर्मा ने बताया है कि प्रदेश में अब महज नक्सल कैडर की संख्या 35–40 ही रह गई है। वे भी जल्द ही आत्मसमर्पण कर देंगे। इस बाबत आईजी बस्तर पी. सुंदरराज ने भी कहा, “दंडकारण्य में माओवादी आंदोलन के इतिहास में पहली बार यह संगठन प्रभावी रूप से नेतृत्वहीन हो गया है।”

इन्हें भी पढ़ें:-

होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से मानवीय सहायता ‘पहुंचाने और उसमें तेजी लाने’ में मदद करेगा ईरान

उप्र:मंत्री 45 मिनट इंतजार के बाद कार्यक्रम से चले गए,भाजपा कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन

शाहजहांपुर में काकोरी के शहीदों की ‘पुरानी’ प्रतिमाओं की पुनःस्थापन को लेकर नया विवाद

ईरान समर्थक हैकिंग समूह ने एफबीआई निदेशक काश पटेल के निजी खाते को हैक करने का दावा किया

रूपाली चाकणकर ने राकांपा महाराष्ट्र महिला शाखा की प्रमुख के पद से इस्तीफा दिया

ईरान ने अपने परमाणु केंद्रों को निशाना बनाए जाने की बात कही

Q1. संसद में नक्सलवाद पर चर्चा कब होगी?

लोकसभा में नक्सलवाद खात्मे पर चर्चा 30 मार्च 2026 को शुरू होगी।

Q2. छत्तीसगढ़ में माओवादी स्थिति कैसी है?

पापा राव और अन्य नेताओं के सरेंडर के बाद संगठन नेतृत्वहीन हो चुका है।

Q3. माओवादी नेताओं ने कितने हथियार सरेंडर किए?

पिछले हालात में पांच हथियार सरेंडर किए गए, जिनमें AK-47 और INSAS शामिल हैं।