भारत ने खामेनेई के निधन पर शोक जताया; विदेश सचिव ने ईरानी दूतावास का दौरा किया

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भारत ने खामेनेई के निधन पर शोक जताया; विदेश सचिव ने ईरानी दूतावास का दौरा किया

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  • Publish Date - March 5, 2026 / 10:34 PM IST,
    Updated On - March 5, 2026 / 10:34 PM IST

(तस्वीरों के साथ)

नयी दिल्ली, पांच मार्च (भाषा) भारत ने बृहस्पतिवार को ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या पर शोक व्यक्त किया। यह शोक संवेदना ऐसे समय में व्यक्त की गयी जब विपक्षी दलों ने सरकार की इस हत्या पर चुप्पी और श्रीलंका के तट पर अमेरिका द्वारा एक ईरानी जहाज को डुबोए जाने पर प्रतिक्रिया न व्यक्त करने पर उसकी कड़ी आलोचना की थी।

अमेरिका और इजराइल द्वारा तेहरान पर किए गए संयुक्त हमले में खामेनेई की हत्या के छह दिन बाद, विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने ईरानी दूतावास का दौरा किया और भारत सरकार की ओर से शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए। मिसरी ने ईरानी दूत मोहम्मद फताली से संक्षिप्त बातचीत भी की।

इसके अलावा, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची को फोन किया और पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा की। 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमले के शुरूआत के बाद से दोनों विदेश मंत्रियों के बीच फोन पर दूसरी बार बातचीत हुयी।

मिसरी ने खामेनेई की मृत्यु पर शोक पुस्तिका में लिखा, “भारत सरकार और जनता की ओर से हार्दिक संवेदना। हम दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं।”

इसे कई लोग संघर्ष पर नयी दिल्ली के रुख में एक बदलाव के संकेत के रूप में देख रहे हैं।

मई 2024 के विपरीत, जब जयशंकर तत्कालीन राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में हुई मृत्यु पर शोक व्यक्त करने के लिए ईरानी दूतावास गए थे, इस बार सर्वोच्च नेता की मृत्यु पर नयी दिल्ली की तरफ से विदेश सचिव शोक व्यक्त करने पहुंचे।

पिछले कुछ दिनों में, सरकार विपक्ष के तीखे हमलों का सामना कर रही है। कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने कहा कि खामेनेई की लक्षित हत्या पर सरकार की चुप्पी ने भारत की विदेश नीति की दिशा और विश्वसनीयता पर गंभीर संदेह पैदा किया है।

भारत ने हालांकि पश्चिम एशिया संकट के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति का आह्वान किया, लेकिन उसने खामेनेई की हत्या पर प्रतिक्रिया न देने का विकल्प चुना।

खामेनेई की हत्या पर नयी दिल्ली की संवेदना उस घटना के एक दिन बाद आई है जब अमेरिका ने श्रीलंका के तट से दूर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस देना को डुबो दिया था। आईआरआईएस देना वह भारत द्वारा आयोजित बहुपक्षीय युद्ध अभ्यास ‘मिलन’ नौसैनिक अभ्यास में भाग लेने के बाद स्वदेश लौट रहा था।

इस हमले में कम से कम 87 ईरानी सैन्यकर्मी मारे गए।

मिलन अभ्यास में भाग लेने के अलावा, इस जहाज ने पिछले महीने विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना द्वारा आयोजित ‘इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू’ में भी हिस्सा लिया था।

भारतीय नौसेना ने बृहस्पतिवार को कहा कि ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस देना से संकटकालीन सूचना मिलने के बाद उसने खोज और बचाव अभियान में हिस्सा लिया।

भारतीय नौसेना के पूर्व प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश ने अमेरिकी कार्रवाई को “बेतुका” और “भड़काऊ कृत्य” बताया।

भाषा प्रशांत रंजन

रंजन

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