‘हीट स्ट्रेस’ के कारण भारत को प्रति टन कार्बन उत्सर्जन पर नौ अमेरिकी डॉलर का नुकसान: अध्ययन

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‘हीट स्ट्रेस’ के कारण भारत को प्रति टन कार्बन उत्सर्जन पर नौ अमेरिकी डॉलर का नुकसान: अध्ययन

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  • Publish Date - September 16, 2026 / 08:43 PM IST,
    Updated On - September 16, 2026 / 08:43 PM IST

नयी दिल्ली, 16 सितंबर (भाषा) अधिक गर्मी और उमस भरे मौसम वाले देशों में पिछले साल ‘हीट स्ट्रेस’ की वजह से लोगों की कार्य क्षमता पर सबसे ज्यादा असर पड़ा तथा इन देशों में भारत भी शामिल है, जहां प्रति टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन पर नौ अमेरिकी डॉलर का नुकसान हुआ। एक अध्ययन में यह अनुमान लगाया गया है।

इससे प्रभावित एवं घनी आबादी वाले अन्य देशों में नाइजीरिया भी शामिल है, जहां प्रति टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन से छह अमेरिकी डॉलर का नुकसान हुआ। चीन में यह नुकसान 4 अमेरिकी डॉलर और पाकिस्तान में 3 अमेरिकी डॉलर रहा। वहीं, वैश्विक स्तर पर 2025 में प्रति टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन से कार्य उत्पादकता में 41 अमेरिकी डॉलर का नुकसान हुआ। यह विश्लेषण ‘नेचर क्लाइमेट चेंज’ पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

शोधार्थियों का कहना है कि जैसे-जैसे जलवायु गर्म हो रही है, लोग अधिक ‘हीट स्ट्रेस’ से प्रभावित हो रहे हैं, जिससे उनकी कार्य क्षमता और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा है।

‘हीट स्ट्रेस’ ऐसी स्थिति को कहते हैं जब शरीर अतिरिक्त गर्मी को बाहर नहीं निकाल पाता। ऐसा होने पर शरीर का अंदरूनी तापमान और दिल की धड़कन बढ़ जाती है। शरीर के अंदर उष्मा संचित होने पर, व्यक्ति का ध्यान भटकने लगता है और किसी काम पर ध्यान केंद्रित करने में मुश्किल होती है। इसके बाद, अक्सर व्यक्ति बेहोश हो जाता है और अगर शरीर के अंदर का तापमान सामान्य नहीं किया जाए, तो मौत भी हो सकती है।

कैलिफ़ोर्निया डेविस विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान एवं नीति विभाग की प्रोफेसर फ्रांसिस मूर ने कहा, ‘‘हमारा अध्ययन इस बात को उजागर करता है कि जलवायु परिवर्तन की असल में क्या कीमत चुकानी पड़ रही है।’’

मूर ने कहा, ‘‘इन नयी संख्याओं के आधाार पर, गर्मी से होने वाली मौतों के बाद, कार्बन की सामाजिक लागत में श्रम दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता है।’’

कार्बन की सामाजिक लागत, कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन के एक अतिरिक्त टन की मापी जा सकने वाली लागत है।

शोधार्थियों ने कहा कि यह माप लागत-लाभ विश्लेषण, बुनियादी ढांचे की योजना, विभिन्न सेवाओं के नियमन और कार्बन कर से जुड़े नीतिगत फैसलों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

प्रति व्यक्ति आधार पर, नुकसान मुख्य रूप से कतर, संयुक्त अरब अमीरात और इराक तथा उप-सहारा अफ्रीका (जिसमें नाइजर, सोमालिया और नाइजीरिया शामिल हैं) में केंद्रित पाया गया।

मूर ने कहा, ‘‘गर्मी बहुत खतरनाक है। नियोक्ताओं और नीति बनाने वालों को इसे सेहत के लिए एक असली खतरे के तौर पर देखना चाहिए और इससे होने वाले नुकसान को कम करने के तरीकों पर गंभीरता से सोचना चाहिए, क्योंकि हमें आगे भी और भीषण गर्मी का सामना करना पड़ेगा।’’

भाषा

सुभाष नरेश

नरेश