नयी दिल्ली, 26 जनवरी (भाषा) भारत ने सोमवार को गणतंत्र दिवस परेड में ब्रह्मोस और आकाश मिसाइल, रॉकेट लॉन्चर प्रणाली ‘सूर्यास्त्र’, मुख्य युद्धक टैंक अर्जुन और नवगठित शक्तिबाण रेजिमेंट का प्रदर्शन किया।
कर्तव्य पथ पर आयोजित इस समारोह में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता भी प्रदर्शित की गई। फ्लाईपास्ट के दौरान एक विशेष ‘एरोहेड फॉर्मेशन’ और एक विशेष त्रि-सेवा झांकी का प्रदर्शन किया गया। इस झांकी में 7-10 मई को पाकिस्तान के साथ हुए संघर्ष के दौरान सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच तालमेल दर्शाया गया।
यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष, उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने मुख्य अतिथि के रूप में इस समारोह की शोभा बढ़ाई।
पहली बार, परेड में भारतीय सेना का ‘बैटल एरे फॉर्मेट’ दिखाया गया, जिसमें इसके हवाई घटक भी शामिल थे। इसका मतलब था कि सेना की टुकड़ी ने एक युद्ध स्थिति की तरह क्रमबद्ध तरीके से मार्च किया, जिसमें पहले टोही दल ने मार्च किया, उसके बाद अन्य सैन्य इकाइयां आदि शामिल हुईं।
टोही दल में 61 कैवलरी शामिल थी, जो सक्रिय युद्धक पोशाक में थी। इसके बाद एक हाई मोबिलिटी टोही वाहन आया। हवाई समर्थन प्रदान करते हुए स्वदेशी ध्रुव एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर और इसके सशस्त्र संस्करण रुद्र, प्रहार फॉर्मेशन में युद्धक्षेत्र को आकार देते हुए प्रदर्शित हुए।
इसके बाद, टी-90 भीष्म और अर्जुन मुख्य युद्धक टैंक सलामी मंच के सामने से गुजरे। अपाचे एएच-64ई और प्रचंड लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर से हवाई सहायता प्राप्त हुई।
अन्य मशीनीकृत टुकड़ियों में बीएमपी-दो इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल और नाग मिसाइल सिस्टम (ट्रैक्ड) एमके-2 शामिल थे।
ऑपरेशन सिंदूर और नियोजित महत्वाकांक्षी ‘सुदर्शन चक्र’ वायु रक्षा प्रणाली को दर्शाने वाले एकीकृत अभियान केंद्र का एक कांच के आवरण में रखा मॉडल भी कर्तव्य पथ पर प्रदर्शित किया गया। इसका नेतृत्व एक महिला सेना अधिकारी ने किया।
परेड के सबसे उत्सुकतापूर्वक प्रतीक्षित आयोजनों में से एक, हवाई उड़ान प्रदर्शन में कुल 29 विमानों ने भाग लिया। इनमें 16 लड़ाकू जेट, चार परिवहन विमान और नौ हेलीकॉप्टर शामिल थे।
इनमें राफेल, सुखोई-30 एमकेआई, मिग-29 और जगुआर विमान शामिल थे। साथ ही सी-130 और सी-295 जैसे रणनीतिक विमान और भारतीय नौसेना के पी-8आई विमान भी मौजूद थे। परेड में अर्जन, वजरंग, वरुण और विजय फॉर्मेशन शामिल थे।
परेड में ब्रह्मोस और आकाश हथियार प्रणालियां, मध्यम दूरी की सतह से वायु में मार करने वाली मिसाइल (एमआरएसएएम) प्रणाली, उन्नत टॉव्ड आर्टिलरी गन सिस्टम (एटीएजीएस), धनुष तोप, दिव्यास्त्र और कुछ ड्रोन का प्रदर्शन शामिल था।
अधिकारियों ने बताया कि 300 किलोमीटर तक की दूरी तक सतह से सतह पर मार करने में सक्षम यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम (यूआरएलएस) सूर्यास्त्र को परेड में पहली बार प्रदर्शित किया गया।
साथ ही टी-90 भीष्म और मुख्य युद्धक टैंक अर्जुन भी प्रदर्शित किए गए, जो अपाचे एएच-64ई और हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर प्रचंड के हवाई समर्थन के साथ सलामी मंच के सामने से गुजरे।
साथ ही बीएमपी-दो इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल और नाग मिसाइल सिस्टम (ट्रैक्ड) एमके-2 जैसे मशीनीकृत कॉलम भी प्रदर्शित किए गए।
अधिकारियों ने बताया कि नवगठित भैरव लाइट कमांडो बटालियन और शक्तिबाण रेजिमेंट, जांस्कर टट्टू और बैक्ट्रियन ऊंट पहली बार समारोह का हिस्सा बने।
समारोह का मुख्य विषय ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होना था।
भाषा अमित नेत्रपाल
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