नयी दिल्ली, तीन मार्च (भाषा) भारतीय नौसेना ने बृहस्पतिवार को कहा कि अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा दागे गए टॉरपीडो के लगने से श्रीलंका तट के पास डूबे ईरानी युद्धपोत ‘आईरिस देना’ से संकटकालीन संदेश मिलने के बाद वह खोज और बचाव अभियान में शामिल हो गई।
ईरानी युद्धपोत भारत द्वारा आयोजित मिलन बहुपक्षीय नौसैन्य अभ्यास में भाग लेने के बाद स्वदेश लौट रहा था। श्रीलंकाई अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में कम से कम 87 ईरानी नाविक मारे गए।
भारतीय नौसेना ने एक बयान में कहा कि उसने श्रीलंका के नेतृत्व में चलाए जा रहे बचाव अभियान में सहयोग करने के लिए बुधवार सुबह 10 बजे लंबी दूरी के एक समुद्री गश्ती विमान के साथ खोज और बचाव अभियान तुरंत शुरू किया।
बयान के अनुसार, ‘‘आसमान से गिराए जा सकने वाले जीवनरक्षक राफ्ट से लैस एक अन्य विमान को भी तत्काल तैनाती के लिए तैयार रखा गया था। आसपास ही तैनात आईएनएस तरंगिनी को बचाव कार्य में सहायता के लिए भेजा गया और वह शाम 4 बजे तक खोज क्षेत्र में पहुंच गई।’’
इसमें कहा गया है, ‘‘उस समय तक श्रीलंका नौसेना और अन्य एजेंसियों द्वारा खोज और बचाव कार्य शुरू किया जा चुका था।’’
भारतीय नौसेना ने बताया कि श्रीलंकाई नौसेना द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, बुधवार तड़के कोलंबो स्थित समुद्री बचाव समन्वय केंद्र (एमआरसीसी) में ‘आईरिस देना’ नामक जहाज से संकटकालीन सूचना प्राप्त हुई।
नौसेना ने बताया कि ईरानी जहाज गॉल से 20 समुद्री मील पश्चिम में श्रीलंका के अधिकार क्षेत्र वाले इलाके में था।
नौसेना ने कहा, ‘‘सूचना मिलते ही भारतीय नौसेना ने तुरंत बचाव और राहत कार्य शुरू कर दिया। सुबह 10:00 बजे लंबी दूरी के एक समुद्री गश्ती विमान को भेजकर श्रीलंका के नेतृत्व में जारी रहे खोज अभियान में सहायता प्रदान की गई।’’
नौसेना ने बताया कि एक अन्य भारतीय नौसैन्य जहाज आईएनएस इक्षक भी खोज अभियान में सहायता के लिए कोच्चि से रवाना हुआ और लापता कर्मियों की तलाश के लिए क्षेत्र में मौजूद है।
नौसेना ने कहा, ‘‘श्रीलंका के साथ खोज और बचाव प्रयासों में समन्वय जारी है।’’
भाषा सुभाष माधव
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