Indian Railways: अगर बीच सफर में थम जाए किसी यात्री की साँसें, तो क्या रोक दी जाती है ट्रेन? जान लीजिए, ऐसी स्थिति में क्या हैं आपके अधिकार..

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Indian Railways: ट्रेन में यात्रा के दौरान, यदि किसी मुसाफिर के साथ अनहोनी हो जाती है या उसकी साँसों की रफ्तार वहीं थम जाती है तो जान लें, क्या हैं आपके अधिकार और कानूनी प्रावधान?

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  • Publish Date - May 20, 2026 / 03:31 PM IST,
    Updated On - May 20, 2026 / 03:38 PM IST

Indian Railways/Image Credit: ScreenGrab / AI Generated

HIGHLIGHTS
  • जानें रेलवे का 'डेथ प्रोटोकॉल'!
  • चलती ट्रेन में मौत होने पर कौन संभालता है मोर्चा?
  • ट्रेन में सफर कर रहे मुसाफिरों के लिए बड़े काम की जानकारी!

Indian Railways Rule for Passenger: भारत में प्रतिदिन लाखों यात्री ट्रेन के माध्यम से यात्रा करते हैं। जहाँ भारतीय रेल, करोड़ों यात्रियों के लिए सुगम यात्रा का माध्यम है, वहीं कुछ मुसाफिरों के लिए, यह सफर किसी अनहोनी के साथ जीवन का अंतिम पड़ाव बन जाता है। रेल में सफर के दौरान, यदि किसी यात्री की किसी कारणवश तबीयत अचानक बिगड़ जाए या फिर किसी प्राकृतिक कारणों से उसकी मृत्यु हो जाए तो, अकसर लोगों के मन में यह प्रश्न उठता है कि क्या ऐसे में ट्रेन तुरंत रोक दी जाती है या अपने निर्धारित गंतव्य की ओर बढ़ती रहती है?

Train News: यात्रा के दौरान मृत्यु हो जाने पर रेलवे के नियम!

सफर के दौरान, ऐसी किसी भी घटना की स्थिति में कानूनी कार्यवाही को व्यवस्थित रखने के लिए भारतीय रेलवे ने इस संबंध में कड़े और स्पष्ट नियम बनाए हैं। यात्रा के दौरान किसी अप्रिय घटना की स्थिति में सर्वप्रथम टी.टी.ई (TTE) या गार्ड को सूचित किया जाता है, हालांकि ट्रेन को बीच सफर में रोकने के बजाय अगले स्टेशन तक ले जाया जाता है।

प्रोटोकॉल के तहत, ट्रेन को अगले उस प्रमुख जंक्शन या स्टेशन पर रोका जाता है जहाँ डॉक्टर और मेडिकल टीम उपलब्ध हो, ताकि मृत्यु की पुष्टि और अन्य कानूनी कार्यवाही पूरी की जा सके।

Government Railway Police (जीआरपी) और ‘चिकित्सा टीम’ संभालती है मोर्चा!

ट्रेन के स्टेशन पहुँचते ही “राजकीय रेलवे पुलिस” (GRP) और मेडिकल टीम तत्काल घटना स्थल पर पहुँचकर अपनी कार्यवाही शुरू कर देता है। सबसे पहले डॉक्टर द्वारा मौत की आधिकारिक पुष्टि की जाती है जिसके पश्चात पुलिस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और कागज़ी कार्यवाही में जुट जाता है।

यदि मृत्यु के पीछे दिल का दौरा या कोई लम्बी बीमारी जैसे प्राकृतिक कारण पाए जाने पर पुलिस शव का पंचनामा भर्ती है और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पोस्टमार्टम (Post-mortem) के लिए भेजा जाता है। मृतक की पहचान की पुष्टि होते ही, पुलिस प्रशासन द्वारा शव को अंतिम संस्कार हे लिए परिवार को सौंप दिया जाता है।

सहयात्रियों के लिए क्या विकल्प है ?

ऐसी स्थिति में मृतक के साथ सफर कर रहे पारिवारिक सदस्य, सम्बन्धी या मित्र को स्टेशन पर उतरने की सुविधा दी जाती है, ताकि सफर कर रहे बाकी यात्रियों की यात्रा में कोई रुकावट उत्पन्न न हो..

Indian Railways: क्या ऐसे में रेलवे मुआवजा देती है?

यह इस बात पर निर्भर होता है कि मृत्यु किसी बीमारी से हुई है या फिर किसी दुर्घटना की वजह से..

  • मुआवजा केवल उन्हीं परिस्थितियों में मिलता है जब मृत्यु का कारण रेल दुर्घटना हो।
  • किसी प्राकृतिक कारणों से या फिर बीमारी की वजह से मृत्यु होने पर मुआवजा नहीं मिलता है।
  • रेल हादसे के अलावा यदि यात्री ने “यात्री बीमा” करवाया है तो ऐसी स्थिति में भी मुआवजा मिलता है।

रेलवे के नियमों के अनुसार, शव को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए लगेज वैन या पार्सल कोच की सुविधा का उपयोग किया जा सकता है।

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चलती ट्रेन में किसी यात्री की मौत हो जाए तो ट्रेन तुरंत रोक दी जाती है?

नहीं। अगर मौत प्राकृतिक बीमारी (नेचुरल डेथ) से हुई है, तो ट्रेन को आमतौर पर अगले स्टेशन तक नहीं रोका जाता। स्टॉपेज पर शव उतारा जाता है। लेकिन अगर मौत संदिग्ध, दुर्घटना या अपराध से जुड़ी लगती है, तो ट्रेन को तुरंत रोका जा सकता है और आरपीएफ/पुलिस बुलाई जाती है।

शव को घर ले जाने के लिए रेलवे क्या व्यवस्था करती है?

रेलवे Human Remains Transport सुविधा देती है। शव को पार्सल वैन या गार्ड वैन में बहुत कम खर्च पर भेजा जा सकता है। डेथ सर्टिफिकेट, पुलिस NOC और एंबाल्मिंग सर्टिफिकेट जरूरी होते हैं।

ऐसी स्थिति में सहयात्रियों को क्या करना चाहिए?

तुरंत टीटीई या गार्ड को सूचित करें। 139 या 182 हेल्पलाइन पर कॉल करें। अगले स्टेशन पर परिवार को सूचना दें। जरूरत पड़ने पर यात्रा रद्द करके रिफंड भी मांगा जा सकता है।

पोस्टमॉर्टम जरूरी है या नहीं?

हाँ। अस्पताल के बाहर या ट्रेन में मौत होने पर पोस्टमॉर्टम अनिवार्य होता है। पुलिस FIR दर्ज कर सकती है, खासकर अगर मौत का कारण स्पष्ट न हो।