(फोटो के साथ)
(विजय जोशी)
नयी दिल्ली, 13 मई (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने विदेशों में रहने वाले भारतीयों से अपील की है कि वे भारतीय मूल्यों और संस्कृति से जुड़े रहते हुए स्थानीय समुदाय के लिए अधिक योगदान दें, ताकि वे वहां के समाज में बेहतर ढंग से घुल-मिल सकें।
होसबाले ने ‘पीटीआई-वीडियो के साथ एक विशेष साक्षात्कार में भारतीय प्रवासियों से अपील की कि वे अपने धार्मिक, भाषाई और जातिगत विभाजनों को अंगीकृत देश तक न ले जाएं, बल्कि खुद को तेलुगु, पंजाबी या तमिल समूह के बजाय एक एकजुट भारतीय समुदाय के रूप में प्रस्तुत करें।
उन्होंने कहा, “जैसा देश वैसा भेष। इस कहावत का पालन करना होगा।”
होसबाले इस सवाल पर टिप्पणी कर रहे थे कि क्या विदेशों में रहने वाले भारतीय, विशेषकर अमेरिका में, अपनी भारतीयता को अत्यधिक आक्रामक रूप से प्रदर्शित करके अपने स्थानीय समकक्षों से अनावश्यक रूप से प्रतिकूल ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, न्यूयॉर्क टाइम्स की एक खबर के अनुसार, टेक्सास में एक भारतीय समुदाय ने हाल ही में हनुमान जी की 90 फुट ऊंची प्रतिमा का निर्माण किया, जिससे कुछ लोगों में असहजता पैदा हुई।
होसबाले ने कहा कि भारतीयों द्वारा किया गया कोई भी कार्य अवैध नहीं है, जिसमें प्रतिमा या मंदिरों का निर्माण भी शामिल है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि भारतीयों को मेजबान देश के निर्माण में योगदान देना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘जिस समुदाय, समाज और राष्ट्र में आप रहते हैं, उसके प्रति आपका दायित्व है। आपकी निष्ठा पर कोई सवाल नहीं उठना चाहिए। आपको अपने व्यवहार से इसे प्रदर्शित करना चाहिए। भारत के साथ आपका जुड़ाव स्वाभाविक है, यह होना ही चाहिए, लेकिन आपको अपने आसपास के समुदाय के प्रति भी चिंतित रहना चाहिए, जहां आप रह रहे हैं। उनकी सेवा करनी चाहिए।’’
आरएसएस नेता होसबाले हाल ही में अमेरिका और यूरोप की यात्रा से लौटे हैं। उन्होंने कहा कि प्रवासी भारतीय जिन देशों में भी रह रहे हैं, वहां उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई है।
होसबाले ने कहा, ‘‘उन्होंने (प्रवासी भारतीयों ने) आर्थिक रूप से प्रगति की है। राष्ट्रीय संपदा में उनके योगदान को भी अब मान्यता मिल रही है। पिछले आठ वर्षों में हिंदू समुदाय की प्रति व्यक्ति आय में निश्चित रूप से वृद्धि हुई है। वे एक नेक और जागरूक समाज हैं।’’
जब इसका उल्लेख किया गया कि अमेरिका में भारतीय समुदाय का समाज के प्रति परोपकारी योगदान यहूदी समुदाय की तुलना में बहुत कम है, तो आरएसएस नेता ने कहा कि उन्हें अपनी संख्या और आय के अनुसार अधिक योगदान देना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘हम इसपर जोर दे रहे हैं और अब यह योगदान बढ़ रहा है। देखिए, पहली पीढ़ियां अपने अस्तित्व और अपनी पहचान के लिए संघर्ष कर रही थीं। अब वे एक आत्मविश्वासी समुदाय हैं। निश्चित रूप से वे ऐसा करेंगे। मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है।’’
होसबाले ने कहा कि उन्होंने अमेरिका में रहने वाले प्रवासी भारतीयों से औपचारिक और अनौपचारिक रूप से बातचीत की तथा उनसे कहा, ‘‘व्यक्तिगत रूप से आपमें से अधिकांश सफल हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन क्या हम सामुदायिक रूप से सफल हैं? इसमें कोई संदेह नहीं कि आप कई कार्यक्रम आयोजित करते हैं, एक साथ आते हैं, आदि। लेकिन साथ ही, मतभेद… हमें कमजोर नहीं बनाना चाहिए।’’
होसबाले ने कहा कि विदेशों में आरएसएस की तर्ज पर गठित हिंदू स्वयंसेवक संघ (एचएसएस) स्वतंत्र रूप से कार्य करता है और अमेरिका के विभिन्न हिस्सों में लगभग 175 शाखाएं चलाता है।
उन्होंने कहा, ‘‘जब वे वहां संघ शाखा में आते हैं तो वहां के भेद (भाषाई, जातिगत आदि) मिटने लगते हैं। यही एक चीज है, जिसे हमने करने की कोशिश की है।’’
जब उनसे पूछा गया कि क्या वे अमेरिका में रहने वाले लगभग 54 लाख भारतीय प्रवासियों को एचएसएस का सदस्य बनाने की कल्पना करते हैं, तो होसबाले ने कहा, ‘‘उनमें से सभी एचएसएस के अंतर्गत नहीं आ सकते। यह अव्यावहारिक है, लेकिन बात यह है कि एचएसएस का प्रभाव हो सकता है… वे निश्चित रूप से नेटवर्क बना सकते हैं।’’
उन्होंने कहा कि अमेरिका में एचएसएस के लगभग पांच लाख भारतीय सदस्य हैं। उन्होंने यह भी कहा कि एचएसएस का संचालन आरएसएस द्वारा नहीं किया जाता है।
उन्होंने कहा, ‘‘एचएसएस के लोग विभिन्न देशों में हैं। उनके अपने संगठन हैं। वे उन देशों के कानून के अनुसार गठित किए गए हैं। हम उनके माध्यम से काम नहीं करते हैं। और हम उन्हें किसी भी मामले में मार्गदर्शन नहीं देते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘बस इतना है कि जब वे हमें आमंत्रित करते हैं, तो हम जाते हैं और चर्चा करते हैं। वे स्वतंत्र संगठन हैं, उन्हें लक्ष्य निर्धारित करना होगा और उसे अपने तरीके से प्राप्त करना होगा।’’
भाषा अमित सुरेश
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