भारत के ज्ञान भंडार को आक्रमणकारियों ने ‘‘सुनियोजित रूप से नष्ट’ कर दिया: नीति आयोग के सदस्य

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भारत के ज्ञान भंडार को आक्रमणकारियों ने ‘‘सुनियोजित रूप से नष्ट' कर दिया: नीति आयोग के सदस्य

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  • Publish Date - May 11, 2026 / 08:22 PM IST,
    Updated On - May 11, 2026 / 08:22 PM IST

नयी दिल्ली, 11 मई (भाषा) नीति आयोग के सदस्य गोबर्धन दास ने सोमवार को कहा कि भारत की वैज्ञानिक परंपरा अत्यंत समृद्ध रही है, लेकिन विदेशी शासन के सदियों लंबे दौर में उसे नुकसान पहुंचा। उन्होंने कहा कि ज्ञान का यह भंडार आक्रमणकारियों द्वारा ‘‘सुनियोजित रूप से नष्ट’’ किया गया।

दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में इंद्रप्रस्थ विज्ञान भारती और प्रौद्योगिकी संकाय द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस समारोह को संबोधित करते हुए दास ने कहा कि महर्षि कणाद ने अंग्रेज रसायन विज्ञानी जॉन डाल्टन से लगभग 2,500 वर्ष पहले परमाणु सिद्धांत का प्रतिपादन किया था।

उन्होंने कहा, ‘‘ज्ञान का हमारा भंडार इतना विशाल था कि आक्रमणकारियों ने उसे सुनियोजित तरीके से नष्ट कर दिया। नालंदा पुस्तकालय में आग नौ महीने तक धधकती रही।’’

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए योगेश सिंह ने कहा कि भारत की लंबी गुलामी का एक कारण तकनीकी प्रगति के साथ तालमेल बिठाने में उसकी असमर्थता भी थी। उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस हमें याद दिलाता है कि हमें प्रौद्योगिकी के मामले में कभी समझौता नहीं करना चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों को अनुसंधान और उद्यमिता को मजबूत करने के लिए नवाचार, मौलिकता और रचनात्मकता पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

सिंह ने कहा, ‘‘अगर हम खुद तकनीक विकसित कर सकते हैं, तो हमें ऐसा करना चाहिए। अगर नहीं, तो हमें इसे हासिल करना चाहिए, और अगर यह भी संभव नहीं है, तो हमें तकनीकी रूप से सहयोग करना चाहिए।’’

दास ने कोविड-19 महामारी के दौरान देश के टीका उत्पादन, यूपीआई लेनदेन में नेतृत्व और रणनीतिक रक्षा क्षमताओं में हुई प्रगति का हवाला देते हुए कहा कि भारत एक बार फिर वैश्विक वैज्ञानिक और तकनीकी शक्ति के रूप में उभर रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत के पास विश्व के थोरियम भंडार का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा है और वैज्ञानिक अगले दशक के भीतर ऊर्जा क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए इनका उपयोग करने की दिशा में काम कर रहे हैं।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने वीडियो संदेश के माध्यम से आयोजकों को बधाई दी। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थी विज्ञान मंथन का विवरण पत्र भी जारी किया गया।

विज्ञान भारती के राष्ट्रीय महासचिव विवेकानंद पई ने कहा कि देश की आबादी तक प्रभावी ढंग से पहुंचने के लिए भारतीय भाषाओं में विज्ञान को बढ़ावा देना आवश्यक है।

भाषा आशीष माधव

माधव