नयी दिल्ली, सात मार्च (भाषा) विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को कहा कि भारत का उदय ‘‘रोका नहीं जा सकता’’ और देश अपनी शक्तियों के आधार पर ही अपने विकास की दिशा तय करेगा, न कि दूसरों की ‘‘गलतियों’’ के आधार पर।
‘रायसीना डायलॉग’ में जयशंकर की टिप्पणियां अमेरिकी उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडौ के उस बयान के दो दिन बाद आईं, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका, भारत को उसी प्रकार के आर्थिक लाभ प्रदान करने की गलती नहीं दोहराएगा, जो उसने चीन को दिए थे और जिसके कारण बीजिंग एक प्रमुख प्रतिद्वंद्वी बन गया।
जयशंकर ने हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के बीच सहयोग पर हुई चर्चा में कहा, ‘‘आज जब हम देशों के उत्थान की बात करते हैं, तो देशों का उत्थान खुद उन्हीं देशों द्वारा निर्धारित होता है। भारत का उत्थान भी भारत द्वारा ही निर्धारित होगा।’’
उन्होंने किसी देश का नाम लिये बिना कहा, ‘‘यह हमारी ताकत से तय होगा, न कि दूसरों की गलतियों से।’’
तीन दिन पहले श्रीलंका अपतटीय क्षेत्र में ईरान के युद्धपोत पर हुए अमेरिकी हमले को लेकर कुछ चिंताओं के बीच, जयशंकर ने हिंद महासागर में एक प्रमुख सुरक्षा प्रदाता के रूप में भारत की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश तो डाला, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि इससे क्षेत्र की वास्तविकताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
इस संदर्भ में उन्होंने डिएगो गार्सिया, जिबूती और हंबनटोटा के सैन्य अड्डों का उल्लेख किया।
विदेश मंत्री ने इस सप्ताह कोच्चि में ईरानी नौसैन्य पोत ‘आइरिस लावन’ के लिए तत्काल ‘डॉकिंग’ की भारत की मंजूरी की भी पुष्टि की।
उन्होंने कहा, ‘‘हमें ईरान की तरफ से एक संदेश मिला कि एक पोत, जो संभवतः उस समय हमारी सीमाओं के सबसे करीब था, हमारे बंदरगाह में आना चाहता है। उन्होंने बताया कि उन्हें कुछ समस्याएं आ रही हैं। एक मार्च को हमने उनसे कहा- आप आ सकते हैं। उन्हें आने में कुछ दिन लगे और फिर उन्होंने कोच्चि में लंगर डाला।’’
श्रीलंका के अपतटीय क्षेत्र में अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा टॉरपीडो दागकर ईरानी युद्धपोत ‘आइरिस डेना’ को डुबोए जाने से कुछ दिन पहले ईरान की ओर से ‘आइरिस लावन’ के संबंध में भारत से संपर्क किया गया था। इसके बाद, भारतीय नौसेना ने इस पोत को अपने यहां खड़े होने की अनुमति दे दी थी।
‘आइरिस लावन’ चार मार्च को कोच्चि में खड़ा हो गया। यह पोत वर्तमान में कोच्चि में ही है और इसके चालक दल के 183 सदस्यों को मानवीय आधार पर भारतीय नौसेना के परिसरों में ठहराया गया है।
जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (यूएनसीएलओएस) का पालन करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
हिंद महासागर क्षेत्र की स्थिति और भारत की विकास गाथा का विश्लेषण करते हुए जयशंकर ने कहा, ‘‘जो लोग हमारे साथ काम करते हैं, उन्हें जाहिर तौर पर अधिक लाभ मिलेगा; मैं यह नहीं कह रहा हूं कि भारत के उदय में कोई चुनौतियां नहीं हैं, चुनौतियां तो हैं। लेकिन भारत के विकास की दिशा बिल्कुल स्पष्ट है। एक तरह से, यह रुकने वाला नहीं है।’’
बुधवार को ‘रायसीना डायलॉग’ में अपनी टिप्पणी में, लैंडौ ने वाशिंगटन की विदेश नीति के विभिन्न पहलुओं के बारे में बात करते हुए कहा था कि अमेरिका कोई धर्मार्थ संगठन नहीं है।
साथ ही, उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत के साथ संबंधों का विस्तार करने के लिए दृढ़ संकल्पित है और दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता ‘‘अब लगभग अंतिम चरण में है’’।
उन्होंने कहा था, ‘‘भारत को यह समझना चाहिए कि हम भारत के मामले में वही गलतियां दोहराने वाले नहीं हैं जो हमने 20 साल पहले चीन के साथ की थीं, यानी…हम आपको इन सभी बाजारों को विकसित करने दें, और फिर अचानक हम देखें कि आप कई व्यावसायिक क्षेत्रों में हमसे आगे निकल गए हैं।’’
लैंडो ने कहा, ‘‘हम यह सुनिश्चित करेंगे कि हम जो भी करें, वह हमारी जनता के लिए उचित हो, क्योंकि अंततः, हमें अपनी जनता के प्रति जवाबदेह होना होगा, ठीक उसी तरह जैसे भारत सरकार को अपनी जनता के प्रति जवाबदेह होना पड़ता है।’’
भाषा नेत्रपाल सुरेश
सुरेश