भारत का उदय विश्व में शांति और समृद्धि लाने वाला होना चाहिए: भागवत

भारत का उदय विश्व में शांति और समृद्धि लाने वाला होना चाहिए: भागवत

भारत का उदय विश्व में शांति और समृद्धि लाने वाला होना चाहिए: भागवत
Modified Date: June 16, 2026 / 12:28 am IST
Published Date: June 16, 2026 12:28 am IST

नयी दिल्ली, 15 जून (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने सोमवार को कहा कि “विश्वगुरु” के रूप में भारत का उदय उसके सभ्यतागत मूल्यों से प्रेरित होना चाहिए और उसका उद्देश्य दुनिया में शांति तथा समृद्धि लाना होना चाहिए।

भागवत ने श्रम की गरिमा, समृद्धि के न्यायसंगत वितरण, नैतिक तरीके से धन सृजन एवं राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर भी जोर दिया।

नयी दिल्ली में 18वें बीएमएल मुंजाल पुरस्कार समारोह में अपने संबोधन में भागवत ने कहा कि भारत केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि एक ऐसी शाश्वत सभ्यता है जिसने आक्रमणों, विदेशी शासन और ऐतिहासिक उथल-पुथल के बावजूद अपना अस्तित्व बनाए रखा है।

उन्होंने कहा, “गंगा हजारों वर्षों से बह रही है। वह प्राचीन है, लेकिन उसमें बहने वाला जल हमेशा नया होता है। गंगा शाश्वत भी है और निरंतर नवीन भी। भारत भी शाश्वत है और निरंतर नवीन है। भारत केवल एक भौगोलिक क्षेत्र का नाम नहीं है, बल्कि एक अस्तित्व और सभ्यतागत पहचान का नाम है।”

भागवत ने कहा कि भारत की प्रगति का लाभ केवल देश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया को मिलेगा।

उन्होंने कहा, “जब भारत आगे बढ़ता है तो केवल भारत को ही लाभ नहीं होता। भारत के विकास के साथ दुनिया में शांति और सुख-समृद्धि का विस्तार होता है। एक प्रयास से तीन उद्देश्य पूरे होते हैं—व्यक्ति का कल्याण, राष्ट्र का कल्याण और आने वाली पीढ़ियों का कल्याण।”

भाषा सुरभि प्रशांत

प्रशांत


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