भारत की विकास संबंधी सफलताओं से लाभ उठाना चाहता है इंडोनेशिया

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भारत की विकास संबंधी सफलताओं से लाभ उठाना चाहता है इंडोनेशिया

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  • Publish Date - July 5, 2026 / 07:39 PM IST,
    Updated On - July 5, 2026 / 07:39 PM IST

नयी दिल्ली, पांच जुलाई (भाषा) इंडोनेशिया अब भारत को केवल एक रणनीतिक साझेदार के तौर पर ही नहीं, बल्कि प्रौद्योगिकी, नीतिगत विचारों और विकास से जुड़े समाधानों के एक भरोसेमंद स्रोत के तौर पर भी देख रहा है। यहां सरकारी अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का छह से आठ जुलाई तक इंडोनेशिया दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब दोनों देशों के बीच साझेदारी पारंपरिक सहयोग से आगे बढ़ रही है।

इन क्षेत्रों में भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) और बैंक ऑफ इंडोनेशिया द्वारा शुरू किए गए क्यूआर भुगतान कोड ‘क्यूआरआईएस’ के बीच प्रस्तावित जुड़ाव भी शामिल है, जिससे बाली और इंडोनेशिया की अन्य जगहों पर जाने वाले भारतीय पर्यटक अपने मोबाइल फोन के जरिए आसानी से सभी तरह के भुगतान कर सकेंगे।

खाद्य सुरक्षा और डिजिटल शासन से लेकर स्वास्थ्य देखभाल, कृषि और रक्षा तक के क्षेत्र में भारत के सफल ‘पब्लिक पॉलिसी मॉडल’ इंडोनेशिया की खुद की विकास यात्रा के लिहाज से महत्वपूर्ण संदर्भ बन रहे हैं।

अधिकारियों ने बताया कि इंडोनेशिया के कई प्रतिनिधिमंडलों ने भारत की डिजिटल अवसंरचना, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, चावल में पोषक तत्वों का संवर्धन योजना, उर्वरक सब्सिडी में सुधार, ‘एग्रीस्टैक’ जैसी समाज कल्याण की योजनाओं से सीखने के लिए भारत का दौरा किया है।

उन्होंने कहा कि आधार, यूपीआई, डिजिलॉकर, ई-केवाईसी और ओएनडीसी की सफलता का आधार बने भारतीय डिजिटल समाधान भी इंडोनेशिया के अपने डिजिटल बदलाव में प्रासंगिक साबित हो रहे हैं।

यह बदलाव प्रौद्योगिकी को अपनाने से आगे बढ़कर गहरे संस्थागत सहयोग की ओर है, जिसमें भारतीय कंपनियां सुरक्षित और बड़े पैमाने पर डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना बनाने में अपने अनुभव का योगदान दे रही हैं।

एक अधिकारी ने कहा, ‘‘आज इंडोनेशिया भारत को न केवल एक रणनीतिक साझेदार के तौर पर, बल्कि प्रौद्योगिकी, नीतिगत विचारों और विकास संबंधी समाधानों के एक भरोसेमंद स्रोत के तौर पर भी देख रहा है।’’

अधिकारियों ने बताया कि इंडोनेशिया डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में भारत की विशेषज्ञता का लाभ उठा रहा है और यूपीआई-क्यूआरआईएस के बीच प्रस्तावित जुड़ाव से दोनों देशों के यात्रियों और कारोबारियों के लिए आसानी से भुगतान करना संभव हो सकेगा।

इस पहल से पर्यटन, व्यापार और डिजिटल वाणिज्य को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, साथ ही इससे लेन-देन तेज़, सस्ता और अधिक सुविधाजनक हो जाएगा।

यूपीआई-क्यूआरआईएस में जुड़ाव हर साल बाली समेत इंडोनेशिया की अन्य जगहों पर जाने वाले लगभग 17 लाख भारतीय पर्यटकों के लिए क्रांतिकारी साबित होगा।

भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना भी सहयोग का एक अहम क्षेत्र बनकर उभरी है।

इंडोनेशिया का ओपन नेटवर्क (आईओएन) भारत के ओएनडीसी मॉडल से प्रेरित है और इसका मकसद इंडोनेशिया के 6.5 करोड़ से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए एक अधिक खुला और समावेशी ‘डिजिटल मार्केटप्लेस’ बनाना है।

‘बेकन 2.0 ओपन प्रोटोकॉल’ पर बने आईओएन के तहत पहला प्रत्यक्ष लेनदेन सात जुलाई को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की शिखर बैठक के दौरान होने की उम्मीद है।

इंडोनेशिया का मुफ्त पौष्टिक भोजन कार्यक्रम भारत के ‘मिड-डे मील’ (पीएम पोषण) योजना से प्रेरित है। इसी तरह उनकी ‘रेड एंड व्हाइट विलेज कोऑपरेटिव’ पहल ‘जन औषधि’ मॉडल के जरिए सस्ती दवाइयों के लिए भारत के साथ सहयोग की संभावना तलाश रही है, जिससे ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

इंडोनेशिया रक्षा उत्पादन, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, सैन्य प्रशिक्षण और समुद्री सहयोग के मामलों में भी भारत के साथ मिलकर काम कर रहा है। ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत स्वदेशी रक्षा उत्पादन में भारत का अनुभव लंबे समय के सहयोग के लिए नए अवसर पैदा कर रहा है।

भाषा संतोष सुभाष

सुभाष