नयी दिल्ली, 14 मई (भाषा) ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बृहस्पतिवार को कहा कि ईरान ‘‘अवैध विस्तारवाद और युद्धोन्माद’’ का शिकार है तथा ब्रिक्स देशों को अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन को लेकर अमेरिका तथा इजराइल की ‘‘स्पष्ट रूप से निंदा’’ करनी चाहिए।
अराघची ने यह बात नयी दिल्ली में दो दिवसीय ब्रिक्स सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर कही, जिसकी अध्यक्षता विदेश मंत्री एस जयशंकर ने की और जिसमें रूस, ब्राजील तथा संगठन के अन्य सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों ने भाग लिया।
उन्होंने कहा, ‘‘सच्चाई यह है कि ईरान, कई अन्य स्वतंत्र देशों की तरह, अवैध विस्तारवाद और युद्धोन्माद का शिकार है। ये घिनौनी बातें हैं जिनका आज की दुनिया में कोई स्थान नहीं है।’’
भारत द्वारा आयोजित इस बैठक का महत्व और भी बढ़ गया क्योंकि प्रभावशाली गुट पश्चिम एशिया संकट के आर्थिक नतीजों से जूझ रहा है, विशेष रूप से अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच युद्ध के कारण ऊर्जा आपूर्ति में आई गंभीर बाधाओं के चलते।
उन्होंने कहा, ‘‘भयानक हिंसा के बावजूद, ईरानी जनता ने दृढ़ता और गर्व के साथ अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाई है। क्या हम स्वतंत्रता के अपने आदर्श से पीछे हट गए? क्या हमने साम्राज्यवादी सत्ता की इच्छाओं और मनमानी के आगे आत्मसमर्पण कर दिया? इसका उत्तर स्पष्ट है: हमने ऐसा नहीं किया, और न ही कभी करेंगे।’’
अराघची ने कहा, ‘‘जैसा कि मैंने बार-बार कहा है, ईरान से संबंधित किसी भी समस्या का सैन्य समाधान संभव नहीं है। हम ईरानी कभी किसी दबाव या धमकी के आगे नहीं झुकते, बल्कि सम्मान की भाषा में जवाब देते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि हमारी शक्तिशाली सशस्त्र सेनाएं विदेशी आक्रमणकारियों को करारा जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, फिर भी मेरे लोग शांतिप्रिय हैं और युद्ध नहीं चाहते। इस भयावह स्थिति में हम आक्रमणकारी नहीं, बल्कि पीड़ित हैं।’’
माना जाता है कि सम्मेलन के दो सत्रों में से एक के दौरान अराघची और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के विदेश मामलों के राज्य मंत्री खलीफा शाहीन अल मरार के बीच तीखी बहस हुई और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने स्थिति को शांत कराने के लिए हस्तक्षेप किया।
ईरान-अमेरिका-इजराइल युद्ध को लेकर ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच तीखे मतभेदों ने पिछले महीने समूह के उप विदेश मंत्रियों और पश्चिम एशिया तथा उत्तरी अमेरिका के लिए विशेष दूतों की बैठक के दौरान संघर्ष पर आम सहमति बनाने के भारत के प्रयासों को रोक दिया।
संयुक्त अरब अमीरात और ईरान के बीच मतभेदों के कारण इस संघर्ष पर कोई सर्वसम्मत बयान जारी नहीं हो सका।
हाल के हफ्तों में दोनों पड़ोसी देशों के बीच संयुक्त अरब अमीरात में ऊर्जा अवसंरचना पर ईरान के कथित हमलों को लेकर तीखी बहस हुई है।
भाषा
नेत्रपाल माधव
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