लेह, तीन अगस्त (भाषा) लद्दाख प्रशासन ने लद्दाख महिला सहकारी समिति लिमिटेड के कामकाज और करघों के पंजीकरण में कथित अनियमितताओं का मामला गृह मंत्रालय (एमएचए) के संज्ञान में लाया है। अधिकारियों ने यह जानकारी देते हुए बताया कि यह कदम आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर उठाया गया है।
अधिकारियों ने 30 जुलाई को गृह मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव को भेजे गए एक पत्र का हवाला देते हुए बताया कि लद्दाख के सामान्य प्रशासन विभाग ने कहा है कि इस महिला सहकारी समिति का पंजीकरण उस समय हुआ था, जब भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी प्रसन्ना रामास्वामी सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार (आरसीएस) के पद पर कार्यरत थे।
अधिकारियों के अनुसार, अभिलेखों से पता चलता है कि रामास्वामी और उनकी पत्नी अभिलाषा बहुगुणा समिति के सह-संस्थापक सदस्यों के रूप में सूचीबद्ध थे।
उन्होंने बताया कि समिति के उपविधियों के अनुसार लेह के उपायुक्त पदेन अध्यक्ष होते हैं। ऐसे में वर्ष 2015 से 2017 तक लेह के उपायुक्त रहने के दौरान रामास्वामी समिति के अध्यक्ष भी रहे।
प्रशासन ने कहा है कि विभागीय अभिलेखों में इस तरह के जुड़ाव के लिए सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमति लिए जाने का कोई उल्लेख नहीं है।
रामास्वामी वर्तमान में जम्मू-कश्मीर में जनजातीय मामलों के आयुक्त-सह-सचिव के पद पर कार्यरत हैं।
अधिकारियों ने बताया कि पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि इसके बाद महिला सहकारी समिति को सरकारी और गैर-सरकारी स्रोतों से अनुदान, अंशदान तथा संस्थागत सहायता मिली, जिसमें राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) की सहायता तथा कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) मद के तहत प्राप्त वित्तीय सहयोग भी शामिल है।
प्रशासन ने ‘लद्दाख पश्मीना टेक्सटाइल्स’ के लिए भौगोलिक संकेतक (जीआई) पंजीकरण के आवेदन को लेकर भी चिंता व्यक्त की है।
अधिकारियों के मुताबिक विभागीय अभिलेखों में इस आवेदन के लिए सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी का कोई उल्लेख नहीं है, जबकि एक प्रस्तुतीकरण में उद्योग निदेशक की स्वीकृति का दावा किया गया था।
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