भर्ती में अनियमितताएं संवैधानिक व्यवस्था पर सुनियोजित हमला: कर्नाटक उच्च न्यायालय
भर्ती में अनियमितताएं संवैधानिक व्यवस्था पर सुनियोजित हमला: कर्नाटक उच्च न्यायालय
बेंगलुरु, 31 जुलाई (भाषा) कर्नाटक उच्च न्यायालय ने कहा है कि कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) द्वारा 400 पशु चिकित्सा अधिकारी की भर्ती में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोप अगर सच साबित होते हैं, तो यह ‘सिर्फ छिटपुट गड़बड़ी नहीं, बल्कि सरकारी नौकरी से जुड़ी संवैधानिक व्यवस्था पर एक सुनियोजित हमला’ के बराबर होगा।
पीठ ने 29 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान जांच को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने की याचिका पर कर्नाटक सरकार से जवाब मांगा।
मंजूनाथ की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एम नागप्रसन्ना ने कहा कि सरकारी पद पर भर्ती वह जरिया है जिससे अनुच्छेद 16 के तहत ‘समान अवसर’ का संवैधानिक वादा असल में पूरा होता है।
उन्होंने कहा कि अगर इस प्रक्रिया में ‘हेरफेर, पक्षपात या लेनदेन का असर’ होता है, तो नुकसान सिर्फ असफल अभ्यर्थी का नहीं होता, बल्कि सबसे अच्छे अभ्यर्थी का चयन करने की जिम्मेदारी निभाने वाले हर सरकारी संस्थान की विश्वसनीयता का भी होता है।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील गिरीश भारद्वाज ने तर्क दिया कि कथित भर्ती घोटाले के बड़े पैमाने को देखते हुए जांच को अपराध जांच विभाग (सीआईडी) के पास ही रहने देना निरर्थक कदम होगा। उन्होंने कहा कि जनता का भरोसा तभी बहाल हो सकता है जब जांच सीबीआई को सौंपी जाए।
अदालत ने गौर किया कि शिकायत में आरोप लगाया गया था कि भर्ती प्रक्रिया में सिर्फ कुछ अलग-अलग गड़बड़ियां नहीं थीं, बल्कि यह ‘योग्यता को ही खत्म करने की एक सुनियोजित साजिश से पूरी तरह दूषित’ थी।
अदालत इस मामले पर अगली सुनवाई सात अगस्त को करेगी।
राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने 13 जुलाई को केपीएससी के अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहूकार को निलंबित कर दिया था, जिसके बाद से आयोग में ऊहापोह की स्थिति है। अध्यक्ष पर अपनी दो बेटियों को ‘औद्योगिक विस्तार अधिकारी’ के तौर पर गैर-कानूनी तरीके से चयनित कराने में मदद करने का आरोप है।
भाषा संतोष सुरेश
सुरेश

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