भुवनेश्वर, 15 जुलाई (भाषा) पुरी जगन्नाथ मंदिर की एक समिति ने ‘इस्कॉन’ (अंतरराष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ) के उस दावे को खारिज कर दिया है कि निर्धारित समय के बजाय किसी अन्य तारीख पर रथ यात्रा निकालना ‘‘शास्त्र सम्मत’’ है।
समिति ने कहा कि यह दुनिया भर में भक्तों को गुमराह करने की कोशिश है।
भारत के बाहर भगवान जगन्नाथ से जुड़े रथ यात्रा के आयोजनों और अन्य त्योहारों के ‘‘निर्धारित समय के बजाय किसी अन्य समय’’ पर आयोजन को लेकर इस्कॉन और पुरी मंदिर प्रशासन के बीच मतभेद रहे हैं।
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) ने मंगलवार को एक बयान में कहा, ‘‘इस्कॉन के राष्ट्रीय संचार कार्यालय, नयी दिल्ली की ओर से 12 जुलाई 2026 को मीडिया में जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति में झूठे दावे किए गए हैं। इसका मकसद निर्धारित समय के बजाय किसी भी अन्य तारीख पर श्री जगन्नाथ रथ यात्रा निकालकर श्रद्धालुओं को गुमराह करना और गलतफहमी पैदा करना है।’’
एसजेटीए ने कहा, ‘‘यह कहना पूरी तरह गलत है कि इस्कॉन की रथ यात्राएं पूरी तरह स्वीकृत हैं और वे ‘शास्त्रों’ के अनुसार हैं।’’
‘पीटीआई-भाषा’ ने जब फोन पर ‘इस्कॉन’ के ‘कंट्री डायरेक्टर ऑफ कम्युनिकेशंस’ और राष्ट्रीय प्रवक्ता युधिष्ठिर गोविंदा दास से संपर्क किया तो उन्होंने एसजेटीए के विचारों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘इस पर टिप्पणी करना मुश्किल है क्योंकि हमने एसजेटीए का बयान नहीं देखा है।’’
एसजेटीए और इस्कॉन के धर्माचार्यों ने 20 मार्च, 2025 को भुवनेश्वर में एक बैठक की थी।
एसजेटीए ने बताया कि बैठक में शास्त्रों और कुछ अन्य आधारों का हवाला देते हुए इस्कॉन के धर्माचार्यों ने साल भर अलग-अलग तारीखों पर भारत के बाहर रथ यात्रा के आयोजन को सही ठहराने की कोशिश की। हालांकि, मंदिर के धर्माचार्यों ने प्रमाणिक शास्त्रों और पुराणों का हवाला देते हुए उनकी दलीलों को खारिज कर दिया।
भाषा सुरभि सिम्मी
सिम्मी