Jagannath Mandir News: इस दिन बंद रहेगा जगन्नाथ मंदिर, दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को करना पड़ेगा इंतजार, जानें मंदिर प्रशासन ने क्यों लिया ये फैसला

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Jagannath Mandir News: पुरी का भगवान जगन्नाथ मंदिर में विशेष धार्मिक अनुष्ठानों की तैयारियों के मद्देनजर रविवार दोपहर 1:30 बजे तक बंद रहेगा।

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  • Publish Date - June 27, 2026 / 08:18 PM IST,
    Updated On - June 27, 2026 / 08:20 PM IST

Jagannath Mandir News/ Image: Jagannath mandir

HIGHLIGHTS
  • भगवान जगन्नाथ मंदिर रविवार दोपहर 1 बजे तक श्रद्धालुओं के लिए बंद रहेगा।
  • विशेष धार्मिक अनुष्ठानों की तैयारियों के मद्देनजर मंदिर प्रशासन ने ये फैसला लिया है।
  • 29 जून को आयोजित होगी भगवान जगन्नाथ की वार्षिक ‘स्नान यात्रा’।

Jagannath Mandir News: पुरी: ओडिशा के पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में विशेष धार्मिक अनुष्ठानों की तैयारियों के मद्देनजर शनिवार रात 10:30 बजे से रविवार अपराह्न करीब एक बजे तक श्रद्धालुओं के लिए दर्शन बंद रहेंगे।  अधिकारियों ने बताया कि भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ के जन्मोत्सव के रूप में भी मनाई जाने वाली वार्षिक ‘स्नान यात्रा’ 29 जून को आयोजित होगी।

कब तक बंद रहेगा मंदिर

श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) की ओर से जारी एक अधिसूचना में कहा गया है, ‘‘सोमवार, 29 जून 2026 को ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा के अवसर पर महाप्रभु की स्नान यात्रा आयोजित की जाएगी। श्रीमंदिर में विशेष अनुष्ठानों और अग्रिम तैयारियों के मद्देनजर शनिवार रात 10:30 बजे से रविवार अपराह्न करीब एक बजे तक आम श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के गर्भगृह के कपाट बंद रहेंगे।’’ (Jagannath Mandir News) ‘स्नान यात्रा’ के दौरान भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की प्रतिमाओं को गर्भगृह से बाहर लाकर मंदिर परिसर में वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार पवित्र स्नान कराया जाता है।

प्रशासन ने की व्यापक व्यवस्थाएं

Jagannath Mandir News: एसजेटीए के मुख्य प्रशासक अरविंद पाधी ने संवाददाताओं को बताया कि इस उत्सव में लाखों श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने व्यापक व्यवस्थाएं की हैं। सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की जिम्मेदारी पुलिस संभाल रही है। इस बीच, परंपरा के अनुसार ‘ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी’ के शुभ अवसर पर ‘दैतापति’ सेवक मंदिर में प्रवेश कर गए। (Jagannath Mandir News) इसके साथ ही ‘स्नान पूर्णिमा’ से लेकर ‘नीलाद्रि बीजे’ (रथ यात्रा के बाद देवताओं की मंदिर में वापसी) तक चलने वाले उनके एक माह लंबे धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत हो गई।

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