जैनेंद्र के. जैन भौतिकी में वुल्फ पुरस्कार पाने वाले भारतीय मूल के पहले व्यक्ति बने

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जैनेंद्र के. जैन भौतिकी में वुल्फ पुरस्कार पाने वाले भारतीय मूल के पहले व्यक्ति बने

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  • Publish Date - June 19, 2026 / 09:15 PM IST,
    Updated On - June 19, 2026 / 09:15 PM IST

नयी दिल्ली, 19 जून (भाषा) अमेरिका में रहने वाले भारतीय मूल के सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी जैनेंद्र के. जैन को भौतिकी के क्षेत्र में प्रतिष्ठित वुल्फ पुरस्कार मिला है। उन्हें यह सम्मान ‘कंपोजिट फर्मियन्स’ की खोज के लिए दिया गया है।

उनकी इस खोज ने ‘भिन्नात्मक क्वांटम हॉल प्रभाव’ के बारे में समझ को पूरी तरह बदल दिया और यह आज भी आधुनिक क्वांटम भौतिकी को नयी दिशा दे रही है।

जैन भारतीय मूल के पहले व्यक्ति हैं जिन्हें भौतिकी में वुल्फ पुरस्कार मिला है।

यह पुरस्कार बृहस्पतिवार को यरूशलम में इजराइल की संसद ‘नेसेट’ में आयोजित एक समारोह में इज़राइली राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग ने प्रदान किया।

भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय ने क्रमशः भौतिकी और कृषि के क्षेत्र में वुल्फ पुरस्कार पाने पर जैन और वेंकटेशन सुंदरेशन को बधाई देते हुए ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि इन विजेताओं को उनकी ‘‘अहम खोजों’’ के लिए सम्मानित किया गया।

इसने कहा, ‘‘वुल्फ पुरस्कार हर साल वैज्ञानिकों और कलाकारों को विज्ञान एवं कला के क्षेत्र में उनकी असाधारण उपलब्धियों के लिए दिया जाता है। प्रोफ़ेसर सुंदरेशन को पादप आनुवंशिकी और फ़सल सुधार में उनकी महत्वपूर्ण खोजों के लिए सम्मानित किया गया, जबकि प्रोफ़ेसर जैन को द्वि-आयामी इलेक्ट्रॉन प्रणाली के बारे में हमारी समझ को बेहतर बनाने में उनके योगदान के लिए पहचान मिली।’’

जैन ने कहा, ‘‘इस सम्मान से मैं बहुत गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ। राजस्थान के एक ग्रामीण इलाके में पले-बढ़े एक युवा लड़के के तौर पर जब मैंने यह सफ़र शुरू किया था, तब मैंने जितना सोचा था, उससे कहीं ज़्यादा मुझे भौतिकी से मिला है।’’

जिस खोज के लिए जैन को यह पुरस्कार मिला, वह 1989 की है, जब वह येल विश्वविद्यालय में ‘पोस्टडॉक्टरल स्कॉलर’ थे।

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, उन्होंने भौतकी के सबसे उलझाने वाले रहस्यों में से एक – भिन्नात्मक क्वांटम हॉल प्रभाव पर अपना ध्यान केंद्रित किया।

जैन ने 250 से ज़्यादा वैज्ञानिक लेख और ‘कंपोजिट फर्मियन्स’ नाम का अध्ययन पत्र लिखा, जिसे 2007 में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय प्रेस ने प्रकाशित किया था।

वैज्ञानिक पहचान पाने की जैन की यात्रा राजस्थान के ग्रामीण इलाकों से शुरू हुई, जहाँ उन्हें कम उम्र में ही भौतिकी में दिलचस्पी हो गई थी। भारतीय भौतिक विज्ञानी सत्येंद्र नाथ बोस और अल्बर्ट आइंस्टीन के बीच हुई बातचीत की कहानी ने उन पर गहरा असर डाला, जिसे जैन ने बच्चों की एक पत्रिका में पढ़ा था।

बारह साल की उम्र में, जब वह कोलकाता में अपने परिवार से मिलने गए थे, तो उनकी परिवार की कार एक ट्राम से टकरा गई। उनकी माँ को कभी होश नहीं आया और जैन को गंभीर चोटें आईं, जिसके कारण वह दिव्यांग हो गए।

विज्ञप्ति में कहा गया कि पी.के. सेठी और रामचंद्र शर्मा द्वारा विकसित कम लागत वाले ‘जयपुर फुट’ प्रोस्थेटिक ने उन्हें फिर से चलने और अपनी पढ़ाई जारी रखने में मदद की।

बाद में उन्होंने महाराजा कॉलेज से स्नातक डिग्री, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर से स्नातकोत्तर डिग्री और स्टोनी ब्रुक विश्वविद्यालय से पीएचडी की डिग्री हासिल की।

वुल्फ पुरस्कार कृषि, रसायन विज्ञान, गणित, चिकित्सा और कला के क्षेत्रों में भी दिया जाता है।

भारतीय मूल के दो वैज्ञानिकों को कृषि के क्षेत्र में वुल्फ पुरस्कार मिला चुका है जिनमें डॉ. गुरदेव सिंह खुश, जिन्हें हरित क्रांति में उनके योगदान के लिए पहचाना गया, और पादप जीवविज्ञानी डॉ. वेंकटेशन सुंदरेशन शामिल हैं।

वहीं, ज़ुबिन मेहता को संगीत के क्षेत्र में वुल्फ़ पुरस्कार मिला था।

भाषा नेत्रपाल माधव

माधव