जम्मू-कश्मीर: अदालत ने मस्जिद में हत्या के मामले में पूर्व आतंकवादी को उम्रकैद की सजा सुनाई
जम्मू-कश्मीर: अदालत ने मस्जिद में हत्या के मामले में पूर्व आतंकवादी को उम्रकैद की सजा सुनाई
श्रीनगर, 10 अगस्त (भाषा) जम्मू-कश्मीर की एक अदालत ने 2020 में एक मस्जिद के अंदर एक आतंकी संगठन के पूर्व प्रमुख की हत्या के मामले में एक पूर्व आतंकी को उम्रकैद की सजा सुनाई और कहा कि इबादत स्थल पर हिंसा को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
श्रीनगर के प्रधान सत्र न्यायाधीश हक नवाज जरगर ने छह अगस्त को फैसला सुनाते हुए कहा कि इस तरह के कृत्य सद्भाव और सांप्रदायिक शांति के मूल्यों पर प्रहार करते हैं और इनकी कड़ी न्यायिक निंदा होनी चाहिए।
अदालत ने गुलाम मोहिउद्दीन डार (60) को संगठन तहरीक-उल-मुजाहिदीन के पूर्व प्रमुख अब्दुल गनी डार उर्फ ‘अब्दुल्ला गजाली’ (78) की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई।
गजाली की 13 फरवरी 2020 को गावकदल इलाके में स्थित जमीयत-ए-अहले हदीस मस्जिद के अंदर बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। श्रीनगर के डलगेट इलाके के रहने वाले डार को इस हत्या के कुछ दिन बाद गिरफ्तार किया गया था।
बडगाम जिले के बीरवाह का निवासी गजाली, जमीयत-ए-अहले हदीस के प्रमुख मौलाना शौकत शाह की हत्या के मामले में सह-आरोपी था। मौलाना शौकत शाह की आठ अप्रैल, 2011 को जुमे की नमाज से पहले इसी मस्जिद के बाहर विस्फोट में मौत हो गई थी।
न्यायाधीश ने 12 पन्नों के अपने आदेश में कहा, ‘‘जब गुस्सा उस स्थान में प्रवेश करता है, जो प्रार्थना के लिए बना है, तो आस्था को चोट पहुंचती है, शांति भंग होती है और ऐसे पवित्र स्थान का उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है। इबादत स्थल पर हिंसा को स्वीकार नहीं किया जा सकता। यह सद्भाव, आपसी सम्मान और सांप्रदायिक शांति के मूल्यों पर हमला है।’’
अदालत ने दोषी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया, जिसे कानून के अनुसार वसूला जाएगा। अदालत ने कहा कि दोषी को उधमपुर जिला जेल में रखा जाएगा। अदालत ने कहा कि दोषी ने हिरासत में जो अवधि बिताई है, उसे उसकी सजा में समायोजित किया जाएगा।
अदालत ने जम्मू-कश्मीर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से मृत व्यक्ति के आश्रितों को सात लाख रुपये का मुआवजा देने का भी निर्देश दिया। अदालत ने पीड़ित परिवार की परेशानियों को ध्यान में रखते हुए यह आदेश दिया, जिसमें एक दिव्यांग बच्चा भी शामिल है, जिसे देखभाल की जरूरत है। यह राशि तीन महीने के भीतर दी जानी है।
भाषा शोभना दिलीप
दिलीप

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