जदएस और भाजपा का जीबीआईटी परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के विरोध में संयुक्त मार्च

जदएस और भाजपा का जीबीआईटी परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के विरोध में संयुक्त मार्च

जदएस और भाजपा का जीबीआईटी परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के विरोध में संयुक्त मार्च
Modified Date: August 9, 2026 / 08:31 pm IST
Published Date: August 9, 2026 8:31 pm IST

बेंगलुरु, नौ अगस्त (भाषा) जनता दल सेक्युलर (जदएस) ने अपनी गठबंधन सहयोगी भाजपा के समर्थन से रविवार को बिदादी के पास प्रस्तावित जीबीआईटी परियोजना के लिए किसानों की जमीन के अधिग्रहण के विरोध में अपनी तीन-दिवसीय पदयात्रा शुरू की।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, यह पदयात्रा बेंगलुरु के पास बिदादी के बायरामंगला से शुरू होकर बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क तक जाएगी। इसका नेतृत्व जनता दल एस युवा इकाई के अध्यक्ष निखिल कुमारस्वामी कर रहे हैं। इसमें दोनों दलों के नेता, कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए हैं। करीब 38 किलोमीटर लंबी इस यात्रा का समापन बेंगलुरु में होगा।

जदएस नेता और केंद्रीय मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक और अन्य नेताओं के साथ बायरामंगला में पदयात्रा को हरी झंडी दिखाई।

प्रदर्शनकारियों ने ‘नम्मा भूमि, नम्मा हक्कू’ (हमारी जमीन, हमारा अधिकार) जैसे नारे लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ‘रियल एस्टेट’ हितों को बढ़ावा दे रही है, ‘कमीशन’ हासिल करने की कोशिश कर रही है और किसानों को झूठे मामलों में फंसाकर उनकी आवाज दबाना चाहती है।

इससे पहले भाजपा और जदएस ने बिदादी से बेंगलुरु तक प्रस्तावित परियोजना के खिलाफ अलग-अलग विरोध मार्च निकालने की घोषणा की थी। हालांकि, हाल में दोनों गठबंधन सहयोगी दलों के नेताओं की बैठक हुई, जिसमें विधानमंडल के अंदर और बाहर भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर संयुक्त विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया गया।

कर्नाटक विधानसभा का मानसून सत्र 13 अगस्त से शुरू होगा।

राज्य सरकार ने ‘ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप’ (जीबीआईटी) परियोजना को लेकर अलग-अलग राय और सुझावों की समीक्षा के लिए उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुहानाथन नरेंदर की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की है। समिति को 30 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।

भाजपा और जदएस नेताओं ने सत्तारूढ़ कांग्रेस की उन पूरे पन्ने के समाचार पत्रों में दिए गए विज्ञापनों को लेकर आलोचना की, जिनमें इसे ‘प्रायश्चित यात्रा’ बताया गया था।

प्रदर्शन को संबोधित करते हुए अशोक ने इसे ‘भ्रष्ट सरकार के लिए अंतिम चेतावनी’ करार दिया। उन्होंने कहा कि जो सरकारें किसानों के खिलाफ काम करती हैं, वे कभी लंबे समय तक सत्ता में नहीं रह पातीं।

उन्होंने सरकार और मुख्यमंत्री को चेतावनी दी कि अगर वे अपनी बात पर अड़े रहे, तो उन्हें इसके नतीजे भुगतने होंगे।

अशोक ने कहा कि किसान पिछले 500 दिनों से अधिक समय से आंदोलन कर रहे हैं। यह कोई ‘फर्जी आंदोलन’ नहीं है, बल्कि किसान और उनके परिवार अपने अधिकारों और आजीविका की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

कुमारस्वामी ने कहा कि जदएस राजनीतिक लाभ के लिए पदयात्रा नहीं कर रही है, बल्कि उस जिले के किसानों के लिए लड़ रही है, जिसने उन्हें ‘राजनीतिक जन्म’ दिया था।

भाषा

शुभम नरेश

नरेश


लेखक के बारे में