रांची/दुमका, 10 जून (भाषा) झारखंड में विभिन्न छात्र संगठनों द्वारा राज्य सरकार की 60:40 की नियोजन नीति के खिलाफ बुलाये गये दो दिवसीय राज्य बंद का आंशिक प्रभाव देखने को मिला।
राजधानी रांची में तोड़फोड़ की आशंका के चलते स्कूल—कॉलेज एवं दूकानें पहले से ही बंद कर दी गयीं लेकिन यातायात लगभग सामान्य रहा वहीं दुमका, साहिबगंज और बोकारो में सुबह से ही लगभग सब कुछ बंद रहा और सड़कों पर यातायात नहीं देखने को मिला।
बंद का आह्वान करने वाले झारखंड स्टेट स्टूडेंट्स यूनियन के अध्यक्ष देवेंद्र नाथ महतो ने रांची में सुबह ही दावा किया कि राज्य में दो दिवसीय बंद के आयोजन का पहला पूरी तरह सफल रहा। उन्होंने दावा किया कि समस्त राज्य में पूर्ण बंद रहा और यह कल भी जारी रहेगा।
सुबह से ही दर्जनों छात्र शहर के विभिन्न जगहों पर जाकर दुकानदारों और वाहन चालकों से बंद समर्थन की अपील करते नजर आये लेकिन लोगों ने आवश्यक वस्तुओं, फल एवं सब्जी आदि की अपनी दूकानें खुली रखी हैं और लगभग सभी प्रमुख स्थानों पर यातायात सामान्य है। हालांकि तोड़फोड़ की आशंका में स्कूलों एवं कालेजों ने अपने यहां पहले ही छुट्टी घोषित कर रखी है।
बंद समर्थकों ने रांची के नामकुम इलाके में राष्ट्रीय राजमार्ग पर टायर जलाकर यातायात अवरुद्ध कर दिया लेकिन कुछ देर बाद वहां पहुंची पुलिस ने जलते टायरों को हटा कर यातायात सामान्य किया।
प्रशासन ने पूरे राज्य में सुरक्षा चाक चौबंद रखने की बात कही है।
रांची के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कौशल किशोर ने बताया कि कुछ स्थानों पर छात्र लोगों से बंद का समर्थन करने की अपील करते हुए दिखे लेकिन कहीं से भी किसी प्रकार की अशांति अथवा हिंसा की खबर नहीं और राजधानी में सभी कारोबार आम दिनों की तरह सामान्य रहे। उन्होंने बताया कि बंद समर्थकों ने अनेक स्थानों पर टायर जलाकर यातायात अवरुद्ध करने का प्रयास किया लेकिन इसका कोई खास प्रभाव नहीं था।
झारखंड स्टेट स्टूडेंट्स यूनियन के आह्वान पर 60:40 नियोजन नीति के विरोध में 48 घंटे के लिए झारखंड बंद के पहले दिन रांची में सुबह से ही बस सेवा प्रभावित रही। छात्रों ने रांची से बाहर आने-जानेवाली बसों को रोकने का प्रयास किया।
छात्र नेताओं ने जुलूस निकाला जिसमें छात्र राज्य सरकार की नियोजन नीति के विरोध में नारे लगाते दिखे। इस दौरान उन्होंने सभी बस एसोसिएशन, ट्रक एसोसिएशन, दुकानदार संघ, बाजार समितियों को बंद में सहयोग करने की अपील की।
देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि 31 दिवसीय महा जनांदोलन के प्रथम चरण में सत्ता पक्ष के 42 विधायक समेत कुल 72 विधायकों और 13 सांसदों ने लिखित समर्थन दिया है। उन्होंने बताया कि इससे पहले संपूर्ण झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में हाट बाजार में मांदर नगाड़ा बजाकर सखुआ पत्ता घुमाकर ग्रामीणों को जागरूक किया गया।
महतो ने बताया कि इस बंद से आवश्यक चिकित्सा सेवाओं को मुक्त रखा गया है। उन्होंने दावा किया कि बंद को सफल बनाने के लिए झारखंड के विभिन्न आदिवासी मूलवासी सामाजिक संगठन ने अपना समर्थन दिया है।
महतो ने कहा कि उनके छात्र संगठनों की मांग है कि झारखंडी हित में क्षेत्रीय और जनजातीय भाषा से सुसज्जित खतियान आधारित संवैधानिक नियोजन नीति लागू कर सभी रिक्त पदों पर 100 प्रतिशत स्थानीय लोगों की नियुक्ति की जाए।
दुमका में सुबह से ही बंद का लगभग पूर्ण प्रभाव देखने को मिला क्योंकि यहां नातो हाट/बाजार खुले और नाही सड़कों पर वाहन चले।
दुमका और आसपास के क्षेत्रों में छात्र समन्वय समिति के समन्वयक श्यामदेव हेंब्रम के नेतृत्व में छात्रों ने बड़ा जुलूस निकाल कर सुबह से ही बाजार एवं अन्य प्रतिष्ठानों को बंद करवा दिया।
बोकारो, साहिबगंज, धनबाद, हजारीबाग, जमशेदपुर एवं अनेक अन्य जिलों में बंद समर्थक छात्रों ने टायर और लकड़ियां जलाकर रास्ते बंद करवाये जिससे अनेक स्थानों पर लंबा जाम भी लग गया लेकिन आम तौर पर आज का बंद पूरे राज्य में शांतिपूर्ण एवं आंशिक सफल रहा।
पुलिस ने बताया कि छात्र संगठनों ने शनिवार से दो दिनों के झारखंड बंद की घोषणा की है जिसे देखते हुए सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किये गये हैं। संगठनों ने राज्य में नौकरियों में स्थानीय लोगों के लिए सौ प्रतिशत आरक्षण की मांग की है।
भाषा इन्दु दिलीप अर्पणा
अर्पणा