पटना, 24 जुलाई (भाषा) बिहार में विपक्षी दलों ने शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को छात्रों के विरोध-प्रदर्शन की ‘‘जीत’’ बताया। वहीं, सत्ताधारी भाजपा के नेतृत्व वाले राजग के नेताओं ने एक ‘‘मेहनती’’ मंत्री के तौर पर प्रधान की सराहना की।
प्रदेश कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने प्रधान के इस्तीफे की खबर मिलने के बाद ‘विजय जुलूस’ निकाला।
प्रधान का इस्तीफा एक महीने पहले जंतर-मंतर पर शुरू हुए विरोध-प्रदर्शनों के बाद हुआ।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने कहा, ‘‘हमने पहला दौर जीत लिया है, लेकिन हम यह तभी कह सकते हैं कि न्याय हुआ है जब शिक्षा व्यवस्था में जरूरी सुधार हों, क्योंकि इस व्यवस्था ने हमारे युवाओं के भविष्य को दांव पर लगा दिया है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘बिहार के छात्रों ने विरोध-प्रदर्शन को सफल बनाने में अपना योगदान दिया। प्रधान के इस्तीफे के बाद, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि बाकी मांगें भी पूरी हों, जिनमें आंदोलन में शामिल लोगों के खिलाफ दर्ज सभी मुकदमे वापस लेना भी शामिल है।’’
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया पर प्रधान के त्यागपत्र का स्क्रीनशॉट साझा किया और कहा कि उनका ‘‘पद छोड़ने का फैसला… देशहित को सबसे ऊपर रखने वाला है और नैतिकता की एक प्रेरणादायक मिसाल है’’।
भाजपा ओबीसी मोर्चा के महासचिव निखिल आनंद ने एक बयान जारी कर आरोप लगाया कि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (कॉजपा) और इसमें शामिल मुख्य विपक्षी पार्टियां ‘‘राष्ट्र-विरोधी और हिंदू-विरोधी ताकतों की प्रतिनिधि हैं’’।
आनंद ने कहा, ‘‘नीट पेपर लीक के बहाने एक ओबीसी प्रधानमंत्री को लगातार निशाना बनाया गया और एक ओबीसी कैबिनेट मंत्री को पद छोड़ना पड़ा।’’
राजग में शामिल जनता दल यूनाइटेड के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने पत्रकारों से कहा, ‘‘धर्मेंद्र प्रधान के साथ हमारा जुड़ाव तब से है जब वह बिहार में भाजपा के प्रभारी थे। अपनी अलग-अलग भूमिकाओं में वह एक परिश्रमी व्यक्ति के तौर पर सामने आए, लेकिन कुछ अप्रत्याशित हालात की वजह से मौजूदा घटनाक्रम हुआ।’’
भाषा शफीक प्रशांत
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