चाईबासा, 29 जनवरी (भाषा) झारखंड के स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गई जांच में स्पष्ट हुआ है कि एक परिवार के तीन सदस्यों में एचआईवी संक्रमण का स्रोत चाईबासा सदर अस्पताल के ब्लड बैंक से संबंधित नहीं था। एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक-प्रमुख डॉ. सिद्धार्थ सान्याल ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि दो सदस्यीय टीम ने इस आरोप की गहन जांच की कि एक महिला, उनके पति और उनके बड़े बच्चे में एचआईवी संक्रमण का कारण चाईबासा सुविधा से प्राप्त रक्त के संक्रमण से जुड़ा था।
स्वास्थ्य सेवा उप निदेशक डॉ प्रमोद कुमार सिन्हा ने इस जांच दल का नेतृत्व किया।
डॉ. सान्याल ने कहा, ‘‘ पति ने इस महीने की शुरुआत में मीडिया में एक बयान देकर आरोप लगाया था कि 2023 में चाईबासा सदर अस्पताल में सी-सेक्शन (सिजेरियन सेक्शन) प्रसव के दौरान उसकी पत्नी को खून चढ़ाया गया था। इसके बाद पूरा परिवार एचआईवी से संक्रमित पाया गया।’’
यह मामला तब सामने आया जब उनकी पत्नी जून 2025 में दूसरी बार गर्भवती हुईं और नियमित जांच के दौरान एचआईवी से संक्रमित पाई गईं।
उन्होंने बताया कि इसके बाद, पता चला कि वह व्यक्ति भी एचआईवी से संक्रमित है। दो जनवरी को उनका बड़ा बच्चा बीमार पड़ गया और जांच में वह भी एचआईवी से संक्रमित पाया गया।
डॉ. सान्याल ने इस बारे में कहा, ‘‘ टीम ने चाईबासा सदर अस्पताल के ब्लड बैंक के सभी रिकॉर्ड खंगाले और पाया कि महिला को एक रक्तदाता से एक यूनिट खून चढ़ाया गया था, जबकि एक यूनिट खून सी-सेक्शन के दौरान इस्तेमाल नहीं हो पाया था। हमने पश्चिम सिंहभूम जिले के सोनुआ से रक्तदाता के इस्तेमाल किए गए नमूने का पता लगाया और पाया कि वह एचआईवी नेगेटिव था। ’’
स्वास्थ्य विभाग ने निष्कर्ष निकाला कि 2023 में एचआईवी संक्रमण का स्रोत चाईबासा सदर अस्पताल के ब्लड बैंक से जुड़ा नहीं था।
विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने इस मामले को लेकर चाईबासा सदर अस्पताल के कामकाज की सीबीआई जांच की मांग की थी और ब्लड बैंक को बंद करने में ‘विफल’ रहने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार की आलोचना की थी।
भाषा रवि कांत रवि कांत पवनेश
पवनेश