मतभेदों को रणनीतिक, दीर्घकालिक दृष्टिकोण से सुलझाया जाना चाहिए: चीन ने मिसरी-झाओक्सू वार्ता पर कहा

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मतभेदों को रणनीतिक, दीर्घकालिक दृष्टिकोण से सुलझाया जाना चाहिए: चीन ने मिसरी-झाओक्सू वार्ता पर कहा

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  • Publish Date - February 11, 2026 / 01:03 PM IST,
    Updated On - February 11, 2026 / 01:03 PM IST

(के जे एम वर्मा)

बीजिंग, 11 फरवरी (भाषा) चीन के विदेश मंत्रालय ने नयी दिल्ली में भारत के साथ मंगलवार को हुई रणनीतिक वार्ता पर मंगलवार को कहा कि दोनों देशों को अपने संबंधों को रणनीतिक एवं दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखना चाहिए, मतभेदों को उचित तरीके से सुलझाना चाहिए और सहयोग बढ़ाना चाहिए।

विदेश सचिव विक्रम मिसरी और उनके चीनी समकक्ष मा झाओक्सू ने भारत-चीन रणनीतिक वार्ता की, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं पर चर्चा हुई

मा झाओक्सू भारत में ‘ब्रिक्स’ शेरपा बैठक में भाग लेने आए हैं।

चीन के विदेश मंत्रालय की एक प्रेस विज्ञप्ति में मिसरी और झाओक्सू के बीच बातचीत पर कहा गया कि दोनों पक्षों ने अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्थिति, दोनों देशों की आंतरिक एवं बाहरी नीतियों, साझा हितों से जुड़े क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों तथा चीन-भारत संबंधों पर मित्रतापूर्ण, स्पष्ट और गहन संवाद किया।

दोनों पक्षों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्थिति में जटिल और गहरे बदलावों को देखते हुए भारत और चीन को मिलकर काम करना चाहिए तथा चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच बनी महत्वपूर्ण समझ को गंभीरता से लागू करना चाहिए।

बयान में कहा गया है कि दोनों देशों को चीन-भारत संबंधों को रणनीतिक एवं दीर्घकालिक दृष्टि से देखना और संभालना चाहिए।

इसमें कहा गया है कि दोनों नेताओं के बीच बनी समझ के अनुसार, दोनों देशों को यह रणनीतिक धारणा बनाए रखनी चाहिए कि भारत और चीन प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि सहयोगी साझेदार हैं और दोनों एक-दूसरे के लिए विकास का अवसर हैं, खतरा नहीं।

चीन ने कहा कि दोनों देशों को आपसी विश्वास को मजबूत करना चाहिए, सहयोग बढ़ाना चाहिए, मतभेदों को सही तरीके से सुलझाना चाहिए और संबंधों को स्थिर एवं सही दिशा में आगे बढ़ाना चाहिए।

दोनों पक्षों ने 2026 और 2027 में ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान एक-दूसरे के कार्यों का समर्थन करने पर सहमति जताई।

इसके अलावा दोनों पक्षों ने बहुपक्षवाद, संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीय भूमिका, ‘ग्लोबल साउथ’ में एकता एवं सहयोग को मजबूत करने, अंतरराष्ट्रीय न्याय एवं निष्पक्षता की रक्षा करने, बहुध्रुवीय विश्व के लिए मिलकर काम करने तथा एशिया और विश्व में शांति एवं विकास में योगदान देने पर सहमति जताई।

भारत के विदेश मंत्रालय ने भी अपनी विज्ञप्ति में कहा कि दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़े व्यापक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।

मिसरी और झोआक्सू की बातचीत मुख्य रूप से उन कदमों पर केंद्रित रही, जिनके जरिए दोनों देश संबंधों को स्थिर और पुनर्निर्मित करने की कोशिश कर रहे हैं। पूर्वी लद्दाख में चार साल से अधिक समय तक रहे सैन्य गतिरोध के बीच संबंधों में गंभीर तनाव आया था।

भारतीय-चीन रणनीतिक वार्ता के तहत दोनों पक्षों ने अद्यतन हवाई सेवा समझौते को शीघ्र अंतिम रूप देने की आवश्यकता को स्वीकार किया।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों में ‘‘सकारात्मक गति’’ की समीक्षा की और लोगों के बीच आदान-प्रदान को बढ़ाकर तथा ‘‘संवेदनशील मुद्दों पर चिंताओं को दूर करके’’ संबंधों को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की।

जायसवाल ने ‘‘संवेदनशील मुद्दों’’ के बारे में विस्तार से नहीं बताया, लेकिन समझा जाता है कि भारतीय पक्ष दुर्लभ पृथ्वी खनिजों से संबंधित चीन के निर्यात नियंत्रण उपायों को लेकर चिंतित है।

मिसरी और झाओक्सू की वार्ता पर भारतीय पक्ष की ओर से जारी बयान में कहा गया कि चर्चा मुख्य रूप से ‘‘द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करने और पुनर्निर्माण में हालिया प्रगति तथा आगे संपर्क बढ़ाने के उपायों’’ पर केंद्रित रही।

बयान में कहा गया है, ‘‘दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता द्विपक्षीय संबंधों की समग्र प्रगति के लिए अत्यंत आवश्यक है।’’

इसमें कहा गया है, ‘‘उन्होंने व्यापार से जुड़े मुद्दों और चिंताओं को राजनीतिक एवं रणनीतिक तरीके से सुलझाने की आवश्यकता सहित नेताओं द्वारा दिए गए मार्गदर्शन को लागू करने की प्रतिबद्धता दोहराई।’’

विदेश मंत्रालय ने कहा कि मिसरी ने कैलाश मानसरोवर यात्रा के सफल पुन: आरंभ का उल्लेख किया और यात्रा के विस्तार की उम्मीद जताई।

बयान के अनुसार, ‘‘दोनों पक्षों ने वीजा सुविधा को आसान बनाने, लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने और व्यावहारिक कदम उठाने पर भी सहमति जताई।

मिसरी और झाओक्सू ने कई क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा की।

पिछले कुछ महीनों में भारत और चीन ने अक्टूबर 2024 में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर सैन्य गतिरोध समाप्त होने के बाद संबंधों को सामान्य बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं।

भाषा गोला सिम्मी

सिम्मी