नयी दिल्ली, आठ जुलाई (भाषा) झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बुधवार को कहा कि खनिज से भरपूर इस राज्य को न केवल प्राकृतिक संसाधनों, बल्कि ज्ञान के आधार पर भी अपनी पहचान बनानी चाहिए। साथ ही, उन्होंने खनन को ज्यादा टिकाऊ बनाने के लिए प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल पर जोर दिया।
झारखंड सरकार द्वारा यहां आयोजित ‘राष्ट्रीय हितधारक परामर्श 2026’ को संबोधित करते हुए सोरेन ने कहा कि राज्य भारत की विकास गाथा का अभिन्न अंग है और उन्होंने उद्योग जगत के साथ दीर्घकालिक साझेदारी की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा, “अगर हम देश के औद्योगिक विकास की बात करें, तो झारखंड को शामिल किए बिना ऐसा संभव नहीं दिखता।” उन्होंने कहा कि राज्य ने देश को न केवल खनिज संसाधन, बल्कि नौकरशाह, प्रौद्योगिकीविद और कुशल पेशेवर भी दिए हैं।
हर राज्य की अपनी-अपनी ताकत और विकास की अलग पारिस्थितिकी होने की बात कहते हुए सोरेन ने आगाह किया कि विकास के लिए ‘कॉपी-पेस्ट’ का तरीका अपनाना उचित नहीं होगा।
उन्होंने कहा, “हम एआई, प्रौद्योगिकी और अच्छा शासन चाहते हैं। जिस तरह से एआई और प्रौद्योगिकी का विकास हो रहा है, हमें यह देखना होगा कि पर्यावरण की सुरक्षा करते हुए वैज्ञानिक तरीके से खनन कैसे किया जा सकता है।”
झारखंड के 24 में से 14 जिलों में खनन का काम होने का जिक्र करते हुए सोरेन ने कहा कि आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने के लिए तकनीकी तरक्की का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
उन्होंने राज्य में यूरेनियम और अभ्रक जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के भंडार पर भी प्रकाश डाला।
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में यूरेनियम के बड़े भंडार हैं; उन्होंने ऐसे अनुमानों का हवाला दिया जिनके अनुसार ये भंडार दशकों तक देश की जरूरतें पूरी कर सकते हैं।
उन्होंने अभ्रक के भंडार का पता लगाने में आने वाली चुनौतियों की ओर भी इशारा किया और कहा कि अभी न तो राज्य और न ही केंद्र सरकार के पास इस संसाधन का सही अनुमान लगाने के लिए पर्याप्त तकनीक है।
उन्होंने कहा, “हमारी पहचान केवल खदानों से नहीं, बल्कि ज्ञान से भी बननी चाहिए। यह केवल कामकाज तक सीमित नहीं, बल्कि नवाचार की भी पहचान होनी चाहिए। हमारा लक्ष्य सिर्फ विकास नहीं, बल्कि समावेशी विकास भी होना चाहिए।’’
राज्य सरकार ने एक बयान में कहा कि बुधवार को शुरू हुई दो दिवसीय इस चर्चा में नीति निर्माता, उद्योग जगत के दिग्गज, निवेशक और डिजिटल शासन के विशेषज्ञ, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उद्योग को बढ़ावा देने, निवेश और पर्यटन जैसे विषयों पर बातचीत करने के लिए एक साथ आए हैं।
भाषा प्रशांत रंजन
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