झारखंड: बाघों के संरक्षण से जुड़े मामले में पीसीसीएफ को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश

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झारखंड: बाघों के संरक्षण से जुड़े मामले में पीसीसीएफ को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश

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  • Publish Date - March 26, 2026 / 09:32 PM IST,
    Updated On - March 26, 2026 / 09:32 PM IST

रांची, 26 मार्च (भाषा) झारखंड उच्च न्यायालय ने पलामू बाघ अभयारण्य में बाघों के संरक्षण से जुड़ी जनहित याचिका (पीआईएल) के जवाब में हलफनामा दाखिल नहीं करने के लिए बृहस्पतिवार को राज्य के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) को फटकार लगाई और अगली सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया।

मुख्य न्यायाधीश एम. एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की पीठ पलामू टाइगर रिजर्व में बाघों के संरक्षण से जुड़ी विकास महतो नामक व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

पीठ ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि पीसीसीएफ ने अदालत के आदेशों पर ठीक से गौर नहीं किया और उन्हें गंभीरता से नहीं लिया। अदालत ने उन्हें अगली सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर हलफनामा दाखिल न करने का कारण बताने को कहा।

पीएसएसएफ के एक अधीनस्थ द्वारा दाखिल हलफनामे को अदालत ने खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि मामले में न्यायमित्र के सुझावों के आधार पर पीसीसीएफ की ओर से कुछ महत्वपूर्ण जानकारी दिए जाने की अपेक्षा थी।

अदालत ने पहले भी सुनवाई के दौरान कहा था कि 1974 में स्थापित पालामू टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ने या उसे बढ़ाने के लिए उठाए गए कदमों का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं है।

उच्च न्यायालय इस रिजर्व की स्थिति की लगातार निगरानी कर रहा है और सरकार को बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए कई निर्देश दे चुका है।

जनहित याचिका में पालामू टाइगर रिजर्व के रखरखाव और संरक्षण के लिए दिशा-निर्देश देने की मांग को लेकर दायर की गई थी।

भाषा जोहेब रंजन

रंजन