छत्रपति संभाजीनगर/श्रीनगर, आठ जून (भाषा) जम्मू कश्मीर से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की मीडिया इकाई के प्रभारी ने आरोप लगाया है कि महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर शहर के एक होटल ने उन्हें ‘‘उनकी कश्मीरी पहचान’’ के कारण कमरा देने से इनकार कर दिया।
हालांकि होटल मालिक ने इन आरोपों को खारिज किया और दावा किया कि कमरा पहले ही बुक हो चुका था।
जम्मू कश्मीर के लिए भाजपा के सह-मीडिया प्रभारी साजिद यूसुफ शाह ने रविवार को ‘एक्स’ पर अपना अनुभव साझा किया और पोस्ट को प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को टैग किया।
उन्होंने अपने पोस्ट में सवाल किया, ‘‘क्या इस देश के किसी भी नागरिक को उसकी पहचान या मूल स्थान के कारण अपने ही देश में अवांछित महसूस कराया जाना चाहिए या देर रात वहां से जाने के लिए कहा जाना चाहिए?’’
उन्होंने दावा किया, ‘‘आज मैंने कुछ ऐसा अनुभव किया जिससे मुझे बेहद दुख हुआ। महाराष्ट्र के औरंगाबाद (अब जिसे छत्रपति संभाजीनगर कहा जाता है) में एक होटल में ‘चेक-इन’ करने के लगभग एक घंटे बाद मुझे मेरी कश्मीरी पहचान से जुड़ी चिंताओं के कारण वहां से जाने के लिए कहा गया।’’
उन्होंने लिखा, ‘‘होटल मालिक विनम्र और स्पष्टवादी थे। उन्होंने स्वीकार किया कि निर्णय अनुचित और दुखद है लेकिन वह सिर्फ निर्देशों का पालन कर रहे हैं।’’
शाह ने बताया कि दशकों से कई कश्मीरियों ने जम्मू कश्मीर और शेष भारत के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए काम किया है।
उन्होंने कहा, ‘‘अधिकतर भारतीयों ने हमारा गर्मजोशी और सम्मान के साथ स्वागत किया है। फिर भी इस तरह की घटनाएं दिखाती हैं कि रूढ़िवादिता और आशंकाएं अब भी बनी हुई हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैं इसे इसलिए साझा कर रहा हूं क्योंकि ऐसे क्षण हमें याद दिलाते हैं कि कानून भले ही एक राष्ट्र को एकजुट कर सकते हैं, लेकिन विश्वास और समझ बनाने में अधिक समय लगता है।’’
शाह ने कहा कि उन्हें जिस बात की चिंता है, वह न्यायसंगत और समान व्यवहार से जुड़ा एक व्यापक प्रश्न है।
उन्होंने पूछा, ‘‘मेरे पास किसी भी प्रीमियम या लग्जरी 5-स्टार होटल में ठहरने के साधन हो सकते हैं, लेकिन उस आम कश्मीरी यात्री का क्या जो छत्रपति संभाजीनगर के एक साधारण होटल में ही ठहर सकता है? क्या इस देश के किसी भी नागरिक को उसकी पहचान या मूल स्थान के कारण अवांछित महसूस कराया जाना चाहिए या देर रात होटल छोड़ने के लिए कहा जाना चाहिए?’’
शाह ने यह भी कहा कि उन्होंने होटल मालिक की ईमानदारी की सराहना की और बिना किसी टकराव के वहां से चले गए और वे सहानुभूति पाने या किसी पर दोषारोपण करने के लिए अपना अनुभव साझा नहीं कर रहे हैं।
जिस होटल में वह ठहरने के लिए गए थे वह छत्रपति संभाजीनगर शहर के मिल कॉर्नर इलाके में स्थित है।
संपर्क करने पर होटल मालिक ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि कमरा पहले से ही बुक था, लेकिन कर्मचारियों ने वह कमरा शाह को दे दिया था।
उन्होंने कहा, ‘‘कमरा उन्हें दे दिया गया था और उन्होंने ‘चेक-इन’ भी कर लिया था। जब कर्मचारियों ने मुझे इस बारे में बताया तो मैंने उन्हें सूचित किया कि कमरा पहले से ही बुक था। इसलिए, मैंने तुरंत होटल कर्मचारी को पैसे वापस करने के लिए कहा क्योंकि कमरा पहले से ही बुक था। हमने पहले भी उचित पहचान पत्र दिखाकर कमरा बुक कराने वाले कश्मीरी लोगों को कमरे दिए हैं।’’
शाह ने कहा कि भारत और यहां के लोगों पर उनका विश्वास अटूट है।
भाजपा नेता ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सोशल मीडिया हैंडल को टैग करते हुए कहा, ‘‘मुझे उम्मीद है कि हम एक ऐसे भविष्य की ओर बढ़ते रहेंगे जहां किसी भी नागरिक का मूल्यांकन उसके क्षेत्र, धर्म या पहचान के आधार पर नहीं, बल्कि उसके चरित्र और आचरण के आधार पर किया जाएगा। यही वह भारत है जिसके लिए हमें प्रयास करना चाहिए।’’
शाह के पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के प्रवक्ता इमरान नबी डार ने कहा कि भाजपा नेता को ‘‘अपने ही किए का फल मिल रहा है’’।
डार ने कहा, ‘‘देश भर में भाजपा द्वारा फैलाई जा रही नफरत की राजनीति अब उन्हीं के एक नेता को भुगतनी पड़ रही है।’’
नेकां प्रवक्ता ने कहा, ‘‘कश्मीर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के माहौल में पले-बढ़े एक व्यक्ति को भाजपा की मुस्लिम विरोधी नीतियों का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। उन्हें दरकिनार करने के लिए उनका मुसलमान होना ही पर्याप्त कारण था। कोई भी वफादारी या चापलूसी किसी मुसलमान को उसी पैमाने से आंके जाने से नहीं बचा सकती।’’
उन्होंने कहा कि यह घटना भाजपा के साथ जुड़े मुसलमानों के लिए एक सबक होनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘संदेश स्पष्ट है: मुसलमानों के मामले में स्वीकृति सशर्त होती है। अब आंखें खोलने का समय आ गया है।’’
भाषा
सुरभि अमित
अमित