नयी दिल्ली, नौ अगस्त (भाषा) जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) ने रविवार को कहा कि विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र उमर खालिद की लिखी किताब पर होने वाली परिचर्चा के लिए दी गई अनुमति नौ अगस्त को रद्द कर दी गई।
खालिद 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा मामले की कथित साजिश के सिलसिले में जेल में है।
विश्वविद्यालय ने कहा कि कार्यक्रम के बारे में ‘‘पूरी जानकारी नहीं देने’’ के कारण अनुमति रद्द की गई।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (जेएनयूएसयू) ने अनुमति रद्द किए जाने को प्रशासन का ‘‘मनमाना और तानाशाहीपूर्ण’’ फैसला बताया।
छात्र संघ ने आरोप लगाया कि प्रशासन, अकादमिक चर्चा और असहमति की आवाज को दबाने का प्रयास कर रहा है।
छात्रसंघ द्वारा अंतरराष्ट्रीय आदिवासी अधिकार दिवस पर द्वारा आयोजित की जा रही यह परिचर्चा उमर खालिद की किताब ‘‘फ्रैक्चर्ड कम्युनिटीज: आदिवासी हिस्ट्री एंड द पॉलिटिक्स ऑफ पावर’’ पर होनी थी।
कार्यक्रम शाम तीन बजे स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज-1 (एसएसएस-1) के सभागार में आयोजित किया जाना निर्धारित था।
कार्यक्रम के पोस्टर के अनुसार, इसमें प्रोफेसर प्रभु महापात्र, उमा चक्रवर्ती, शुद्धब्रत सेनगुप्ता और सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर व बानोज्योत्सना शामिल होने वाले थे। जेएनयू ने रविवार को ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में बताया कि सभागार की बुकिंग रद्द कर दी गई है, क्योंकि 10 अगस्त को होने वाले कार्यक्रम के बारे में ‘‘पूरी जानकारी’’ नहीं दी गई थी।
विश्वविद्यालय ने बताया, ‘‘जेएनयू एक लोकतांत्रिक और विकेंद्रीकृत संस्थान है। अनुमति स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के डीन ने दी थी, जिन्होंने कार्यक्रम रद्द करने की कार्रवाई भी की है।’’
विश्वविद्यालय के मुताबिक, ‘‘सभागार की बुकिंग इसलिए रद्द की गई क्योंकि 10 अगस्त 2026 को शाम तीन बजे से छह बजे तक होने वाले कार्यक्रम के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी गई थी।’’
छात्र संघ ने एक बयान में दावा किया कि स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के डीन ने खुद निर्देश दिया था कि सभागार की बुकिंग उसी प्रारूप में की जाए, जिसमें आवेदन दिया गया था।
छात्र संघ ने कार्यक्रम की अनुमति रद्द करने के लिए प्रशासन की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण पर भी सवाल उठाया।
छात्र संघ ने प्रशासन पर ‘‘दोहरा मापदंड’’ अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि संस्थान ने इस्कॉन के कार्यक्रमों के लिए परिसर में सहयोग और जगह उपलब्ध कराई, जबकि किताब पर चर्चा के लिए आयोजन स्थल देने से इनकार कर दिया।
छात्र संघ ने कहा कि किसी किताब पर चर्चा करना अकादमिक संस्कृति और लोकतांत्रिक संवाद का अभिन्न हिस्सा है।
छात्र संघ ने दावा किया कि यह कार्यक्रम किसी वैकल्पिक स्थान पर आयोजित किया जाएगा।
छात्र संघ के अनुसार, यह किताब आदिवासी इतिहास, प्रतिरोध और ‘जल, जंगल और जमीन’ से जुड़े संघर्षों पर केंद्रित है।
भाषा जितेंद्र संतोष
संतोष