नयी दिल्ली, 18 सितंबर (भाषा) राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) प्रश्नपत्र लीक की बार-बार होने वाली घटनाओं को रोकने के लिए प्रणाली को संस्थागत रूप से मजबूत बनाने की जरूरत पर जोर देते हुए, उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को एक असामान्य संकेत दिया कि पीठ में शामिल न्यायाधीश राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की नयी व्यवस्था का जायजा लेने के लिए उसके दफ्तर का दौरा कर सकते हैं।
एनटीए, ‘नीट-यूजी’ आयोजित करता है और बार-बार प्रश्नपत्र लीक होने की वजह से आलोचनाओं का सामना कर रहा है।
एनटीए ने न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ को बताया कि उसने प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए अपने पूरे तंत्र में बदलाव किया है जिसमें प्रशासनिक संरचना से लेकर बुनियादी ढांचा तक, सब कुछ शामिल है।
न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने केंद्र की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि वह और न्यायमूर्ति अराधे, प्रणाली की जांच करने के लिए एनटीए की नयी व्यवस्था वाली जगह का दौरा करना चाहेंगे।
पीठ ने मेहता से कहा, ‘‘बार-बार होने वाले प्रश्नपत्र लीक को रोकने के लिए एनटीए की प्रणाली को संस्थागत रूप से मजबूत करना बहुत जरूरी है। सिर्फ तात्कालिक या अस्थायी उपाय काफी नहीं होंगे। आपको पता होना चाहिए कि पूरी प्रणाली का स्थायी होना ही सबसे जरूरी है।’’
न्यायालय ने कहा, ‘‘स्थायी कर्मचारी और संगठनात्मक ढांचा होना चाहिए। प्रतिनियुक्ति पर बहुत कम लोग होने चाहिए। तभी एक स्थायी ढांचा तैयार हो पाएगा।’’
न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने कहा कि न्यायाधीश दिल्ली में मिंटो रोड पर एनटीए के दफ्तर जाएंगे और देखेंगे कि प्रणाली असल में काम कर रही है या नहीं। साथ ही, वहां के कर्मियों, और अन्य व्यवस्था का भी जायजा लेंगे।
सुनवाई की शुरूआत में, केंद्र ने न्यायालय से कहा कि नीट में संरचनात्मक सुधारों का सुझाव देने के लिए गठित नंदन नीलेकणि की अगुवाई वाली उच्चस्तरीय समिति ने व्यापक विचार-विमर्श किया है और वह संभवत: इस महीने के अंत तक अपनी पहली अंतरिम रिपोर्ट सौंप देगी।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा कि सभी सुझाव समिति के समक्ष रखे गए हैं और समिति ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व अध्यक्ष के. राधाकृष्णन की अगुवाई वाली पूर्व समिति के सदस्यों से भी विचार-विमर्श किया है।
पीठ ने नीलेकणि समिति की सहायता कर रहे कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के संयुक्त सचिव को अब तक उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी देते हुए न्यायालय में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
पीठ ने मेहता से कहा कि इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार नीट आयोजित करने की पूरी प्रक्रिया को संस्थागत स्वरूप देने पर विचार करे।
पीठ ने कहा, ‘‘आपको यह समझना होगा कि पूरी व्यवस्था में स्थायित्व सबसे अहम है। स्थायी ढांचा, स्थायी कर्मचारी और स्थायी प्रकोष्ठ होने चाहिए। प्रतिनियुक्ति पर बहुत कम कर्मचारी होने चाहिए। तभी एक स्थायी व्यवस्था बन सकेगी।’’
न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने कहा कि वह और न्यायमूर्ति अराधे राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की हाल में उन्नत की गई व्यवस्था का जायजा लेने के लिए उसके परिसर का दौरा करना चाहेंगे।
शिक्षा विभाग ने कहा है कि एक नयी और उन्नत व्यवस्था तैयार की गई है।
मेहता ने कहा, ‘‘व्यवस्था में स्थायित्व सुनिश्चित किया गया है। हालांकि, मानव संसाधन की व्यवस्था फिलहाल आंशिक रूप से ही हो पाई है।’’
उच्चतम न्यायालय ने 19 अगस्त को कहा था कि एनटीए में सुधारों को संस्थागत स्वरूप दिए जाने की जरूरत है और उसने केंद्र को निर्देश दिया था कि वह राधाकृष्णन समिति एवं नीलेकणि समिति की सिफारिशों को लागू करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दे।
उच्चतम न्यायालय ‘फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन’ (एफएआईएमए) की ओर से अधिवक्ता तन्वी दुबे द्वारा दाखिल याचिका समेत कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है।
भाषा सुभाष पवनेश
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