न्यायपालिका ‘आप’ का राजनीतिक कार्यालय नहीं: भाजपा नेता चुघ

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न्यायपालिका ‘आप’ का राजनीतिक कार्यालय नहीं: भाजपा नेता चुघ

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  • Publish Date - September 7, 2026 / 01:14 PM IST,
    Updated On - September 7, 2026 / 01:14 PM IST

(फाइल फोटो के साथ)

नयी दिल्ली, सात सितंबर (भाषा) राज्यसभा सदस्य एवं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता तरुण चुघ ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्रा की नियुक्ति का विरोध करने को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर सोमवार को निशाना साधा और कहा कि संविधान उनकी सरकार को इस नियुक्ति पर किसी ‘‘राजनीतिक वीटो’’ का अधिकार नहीं देता।

न्यायमूर्ति मिश्रा ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में सोमवार को शपथ ली।

इससे एक दिन पहले पंजाब सरकार के मंत्रिमंडल ने एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र से कहा था कि जब तक राज्य सरकार की चिंताओं का उचित समाधान नहीं हो जाता, तब तक न्यायमूर्ति मिश्रा को शपथ दिलाने की प्रक्रिया आगे न बढ़ाई जाए।

पंजाब सरकार ने दावा किया था कि न्यायमूर्ति मिश्रा की नियुक्ति राज्य सरकार की राय का इंतजार किए बिना और संवैधानिक नियमों एवं स्थापित प्रक्रियाओं को दरकिनार कर की गई।

मान ने इस संबंध में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया को अलग-अलग पत्र भी लिखे थे।

चुघ ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि न्यायपालिका आम आदमी पार्टी (आप) का राजनीतिक कार्यालय नहीं है और उसकी स्वतंत्रता से सत्तारूढ़ दल के राजनीतिक हितों के लिए समझौता नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा, ‘‘जहां तक मुझे जानकारी है, संविधान मान सरकार को किसी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति पर राजनीतिक वीटो का अधिकार नहीं देता।’’

चुघ ने कहा, ‘‘लेकिन शायद तब ऐसा होता है जब अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया की ‘साम, दाम, दंड, भेद’ की राजनीति मान सरकार की कार्यशैली बन जाती है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘भगवंत मान, आपको याद रखना चाहिए कि पंजाब संविधान से चलता है, केजरीवाल और सिसोदिया की राजनीतिक रणनीति से नहीं।’’

चुघ ने मान सरकार पर स्थानीय निवासी मोहनजीत सिंह की आवाज दबाने का भी आरोप लगाया। सिंह ने पंजाब में मादक पदार्थों की समस्या से निपटने को लेकर ‘आप’ सरकार के रवैये के विरोध में दो सितंबर को शेरों गांव में मुख्यमंत्री के एक कार्यक्रम के दौरान काला झंडा दिखाया था।

चुघ ने कहा, ‘‘पहले आपने उस व्यक्ति की शांतिपूर्ण आवाज दबाई जो मादक पदार्थों के खिलाफ आपकी विफल लड़ाई को लेकर अपना विरोध जताना चाहता था। मान साहब, आपकी पुलिस ने उसे बेहद अमानवीय तरीके से प्रताड़ित किया। मुख्यमंत्री मान, आपने पंजाब उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति में हस्तक्षेप कर अब सारी हदें पार कर दी हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘क्या आपके और आपके राजनीतिक आकाओं की कल्पना के तथाकथित ‘नवा पंजाब’ में रत्ती भर भी लोकतंत्र बचा है?’’

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने सिंह के मामले में चुघ की शिकायत का संज्ञान लेते हुए इस मामले में पंजाब सरकार को पत्र लिखा है।

आयोग ने मामले की तत्काल जांच, चिकित्सकीय-कानूनी परीक्षण, सीसीटीवी फुटेज और पुलिस रिकॉर्ड सुरक्षित रखने तथा दो सप्ताह के भीतर बिंदुवार कार्रवाई रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है।

भाषा सिम्मी वैभव

वैभव