कोलकाता, 10 मई (भाषा) पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को चुनौती देने वाली अपीलों पर सुनवाई कर रहे न्यायाधिकरण से इस्तीफा देने वाले कलकत्ता उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश टी एस शिवज्ञानम ने 22 दिनों की अवधि में नाम हटाने से संबंधित 1,777 अपीलों का निपटारा किया था। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।
पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय के पास उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पूर्व न्यायाधीश ने उन मतदाताओं द्वारा दायर 1,717 अपीलों का निपटारा किया, जिनके नाम एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से हटा दिए गए थे।
अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने बीरभूम जिले में नये नाम शामिल किए जाने के खिलाफ निर्वाचन आयोग द्वारा दायर 60 अपीलों को भी खारिज कर दिया।
न्यायमूर्ति शिवज्ञानम उन 19 पूर्व न्यायाधीशों में शामिल थे, जिन्हें उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर निर्वाचन आयोग ने न्यायिक अधिकारियों के फैसलों के खिलाफ दायर अपीलों की सुनवाई के लिए नियुक्त किया था। ये फैसले मतदाता सूची से नाम हटाए जाने से जुड़े थे।
निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने बताया कि 20 मार्च की अधिसूचना के तहत नियुक्त किए जाने के बाद सेवानिवृत्त न्यायाधीश ने कोलकाता और उत्तर 24 परगना की विधानसभा सीटों से जुड़े मामलों की सुनवाई की।
बाद में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर उन्होंने मालदा, मुर्शिदाबाद और बीरभूम से जुड़े मामलों की भी सुनवाई की।
निर्वाचन आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘उनके न्यायाधिकरण ने कम समय में 1,777 अपीलों का निपटारा किया। यह प्रक्रिया पुनरीक्षण अभियान के लिए निर्धारित कानूनी ढांचे के अनुरूप संचालित की गई।’’
राज्य में मतदान समाप्त होने से एक दिन पहले उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जिन 1,607 लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे, उनके नाम विभिन्न न्यायाधिकरणों द्वारा अपील स्वीकार किए जाने के बाद दोबारा सूची में बहाल किए गए।
अब न्यायमूर्ति शिवज्ञानम के न्यायाधिकरण से जुड़े आंकड़ों के सामने आने के बाद राजनीतिक और कानूनी हलकों में यह सवाल उठने लगे हैं कि बाकी 18 न्यायाधिकरणों ने कुल कितनी अपीलों का निपटारा किया और क्या मतदान समाप्त होने से पहले अधिक मतदाताओं के नाम बहाल किए जा सकते थे।
बहरहाल, निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी ने कहा कि विभिन्न जिलों में अपीलीय कार्यवाही समानांतर रूप से जारी थी और दस्तावेजों की जांच के बाद मतदाता सूची में नाम जोड़े गए।
न्यायमूर्ति शिवज्ञानम ने उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर कांग्रेस नेता मोताब शेख की अपील की भी सुनवाई की थी, जिनका नाम चुनाव से पहले मतदाता सूची से हटा दिया गया था। दस्तावेजों की जांच के बाद न्यायाधिकरण द्वारा उनका नाम बहाल किए जाने के बाद शेख फरक्का सीट से चुनाव लड़ सके और बाद में जीत भी दर्ज की।
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि न्यायमूर्ति शिवज्ञानम ने बृहस्पतिवार को ‘‘मुख्य रूप से निजी कारणों’’ से न्यायाधिकरण से इस्तीफा दे दिया।
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