कोलकाता, 10 मई (भाषा) पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नयी सरकार बनने के बाद केंद्र-राज्य संबंधों में सुधार होने की संभावना है, और ‘डबल इंजन सरकार’ के ढांचे के तहत कई रुकी हुई केंद्रीय योजनाओं को फिर से गति मिलने की उम्मीद है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी।
केंद्र सरकार के सूत्रों के अनुसार, ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य सेवा, पेयजल और रोजगार सृजन जैसे क्षेत्रों में रुकी हुई परियोजनाओं को फिर से शुरू करने और लंबित धनराशि जारी करने की प्रक्रिया आने वाले महीनों में गति पकड़ सकती है।
एक अधिकारी ने बताया कि विचाराधीन प्रमुख योजनाओं में ‘जल जीवन मिशन’ भी शामिल है, जिसके तहत केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के अधिकारियों और राज्य सरकार के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के बीच हाल ही में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान राज्य को देय लगभग 2,700 करोड़ रुपये के लंबित बकाया की समीक्षा की गई।
राज्य सचिवालय के सूत्रों ने बताया कि बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के सचिव और राज्य लोक निर्माण विभाग के शीर्ष अधिकारियों ने भाग लिया, जहां परियोजना कार्यान्वयन, निधि आवंटन और बकाया भुगतान से संबंधित विवरणों पर चर्चा की गई।
राज्य के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’को कहा, ‘‘केंद्र और राज्य के बीच एक व्यापक सहमति बन गई है। औपचारिक तौर-तरीकों पर काम किया जा रहा है, और हमें उम्मीद है कि कई लंबित मुद्दों पर जल्द ही प्रगति होगी।’’
अधिकारियों ने बताया कि ‘जल जीवन मिशन’ के अलावा, ग्रामीण विकास, पंचायती राज, स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्रों में केंद्र प्रायोजित कई योजनाओं से जुड़ी धनराशि जारी करने की तैयारी भी चल रही है।
केंद्र सरकार के सूत्रों का कहना है कि पिछली सरकार और केंद्र के बीच राजनीतिक मतभेद और प्रशासनिक अविश्वास के कारण पिछले कुछ वर्षों में कई कल्याणकारी परियोजनाओं के कार्यान्वयन में देरी हुई है।
राज्य सरकार के एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘‘सरकार बदलने के साथ ही विश्वास की कमी काफी हद तक कम हो गई है। इससे प्रशासनिक समन्वय में आसानी होगी और कार्यान्वयन में तेजी आने की उम्मीद है।’’
पश्चिम बंगाल में लंबे समय से लागू नहीं की गई ‘आयुष्मान भारत’ स्वास्थ्य बीमा योजना पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
सूत्रों ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और राज्य स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कार्यान्वयन दिशानिर्देशों, वित्त पोषण के तरीकों और परिचालन तंत्रों पर प्रारंभिक चर्चा पहले ही कर ली है।
स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘‘अब तक की चर्चाएं रचनात्मक रही हैं। यदि योजना के अनुसार सब कुछ ठीक रहा, तो अगले कुछ महीनों में कार्यान्वयन प्रक्रिया शुरू हो सकती है।’’
केंद्र सरकार 100 दिन की मजदूरी मुहैया कराने की योजना के तहत धनराशि का आवंटन फिर से शुरू करने पर भी विचार कर रही है।
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि प्रशासनिक बाधाओं और डेटा-साझाकरण तंत्रों को लेकर विवादों ने पहले राज्य में योजना के कार्यान्वयन को प्रभावित किया था।
पंचायती राज मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘पिछली सरकार में यह धारणा थी कि केंद्र के साथ विस्तृत आंकड़े साझा करने से बंगाल की छवि नकारात्मक हो सकती है। उस राजनीतिक झिझक ने अंततः विकास कार्यों को प्रभावित किया।’’
वर्ष 2019 में शुरू की गई ‘पीएम-किसान’ योजना को लेकर भी नए सिरे से चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, पिछली राज्य सरकार ने शुरू में केंद्र के साथ किसानों के आंकड़े साझा करने का विरोध किया था, लेकिन बाद में वह 2021-22 वित्तीय वर्ष के दौरान इस योजना को लागू करने पर सहमत हो गई थी।
अधिकारी ने कहा कि अब राज्य में योजना की पहुंच को और अधिक सुव्यवस्थित और विस्तारित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के पहलुओं और पंचायती राज मंत्रालय से जुड़ी कई प्रायोगिक परियोजनाओं को लागू करने पर भी चर्चा चल रही है, जिन्हें पहले पश्चिम बंगाल में लागू नहीं किया गया था।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केंद्र से मिलने वाली सहायता में वृद्धि और प्रशासनिक समन्वय में निकटता से राज्य में बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सेवा और ग्रामीण विकास पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।
हालांकि, विपक्ष के कुछ वर्गों ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार इस सहयोग से राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास कर सकती है, जिससे आने वाले महीनों में राज्य में नई राजनीतिक बहस की पृष्ठभूमि तैयार हो सकती है।
भाषा धीरज दिलीप
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