कांथा कढ़ाई शिल्पी तृप्ति मुखर्जी को पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा

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कांथा कढ़ाई शिल्पी तृप्ति मुखर्जी को पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा

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  • Publish Date - May 21, 2026 / 03:30 PM IST,
    Updated On - May 21, 2026 / 03:30 PM IST

नयी दिल्ली, 21 मई (भाषा) पश्चिम बंगाल की पारंपरिक कढ़ाई कला को संरक्षित करने और बढ़ावा देने के साथ-साथ ग्रामीण महिला कारीगरों को सशक्त बनाने के लिए जानी जाने वाली कांथा कढ़ाई शिल्पी तृप्ति मुखर्जी को 25 मई को एक समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।

कांथा कढ़ाई में 37 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाली मुखर्जी को भारतीय हस्तशिल्प में उनके योगदान, प्रशिक्षण और कौशल विकास के माध्यम से हाशिए पर खड़ी महिलाओं के लिए आजीविका के अवसर पैदा करने के लिए सम्मानित किया जाएगा।

28 अप्रैल, 1966 को जन्मीं मुखर्जी ने अपनी मां के काम से प्रेरणा ली और कम उम्र में ही कांथा कढ़ाई में गहरी रुचि विकसित कर ली।

पिछले कुछ वर्षों में, उन्होंने सूरी में एक प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया, जहां वह महिलाओं को कांथा कढ़ाई, साड़ी कढ़ाई की कला और वॉल हैंगिंग, बेडशीट, स्टोल और दुपट्टे बनाने की कला सिखाती हैं।

यहां प्रशिक्षित कारीगर सरकार द्वारा प्रायोजित प्रदर्शनियों और मेलों में अपने उत्पादों का प्रदर्शन और बिक्री करते हैं जिससे कई महिलाओं को स्थिर आय अर्जित करने में मदद मिलती है।

मुखर्जी ने विदेशों में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया है। 2017 में उन्होंने भारत सरकार द्वारा प्रायोजित एक परियोजना के तहत कांथा कढ़ाई का प्रदर्शन करने के लिए ब्रिटेन के बर्मिंघम की यात्रा की थी।

2025 में उन्होंने वस्त्र मंत्रालय के अधीन हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद द्वारा टोक्यो में आयोजित 14वें इंडिया ट्रेंड फेयर में भाग लिया, जहां उन्होंने भारतीय हस्तशिल्प का प्रदर्शन किया।

मुखर्जी को इससे पहले 2010 में राष्ट्रीय पुरस्कार प्रमाण पत्र, 2016 में वस्त्र मंत्रालय से शिल्प गुरु पुरस्कार और 2017 में पश्चिम बंगाल सरकार से बंगश्री पुरस्कार प्राप्त हो चुका है।

भाषा तान्या नरेश

नरेश