चिक्कबल्लापुर, दो सितंबर (भाषा) कर्नाटक के चिक्कबल्लापुर जिले में दो दशक से अधिक समय तक जमीन आवंटन के लिए प्रयास करने के बावजूद कथित देरी से परेशान होकर कारगिल युद्ध के एक पूर्व सैनिक ने आत्महत्या करने की कोशिश की। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी।
पुलिस के अनुसार, घटना 28 अगस्त को जिले के चिंतामणि तालुक स्थित निरीक्षण बंगले के परिसर में हुई।
अधिकारियों ने बताया कि मराठा लाइट इन्फैंट्री में सेवा दे चुके और कारगिल युद्ध के दौरान घायल हुए सेवानिवृत्त सैनिक शिवानंद रेड्डी ने कथित तौर पर उस जमीन के आवंटन में हो रही देरी से परेशान होकर कीटनाशक पी लिया, जिसे उनकी सैन्य सेवा के सम्मान में उन्हें देने की सिफारिश की गई थी।
रेड्डी का बेंगलुरु के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चिकित्सकों ने अभी तक उन्हें बयान देने के लिए स्वस्थ घोषित नहीं किया है, इसलिए उनका बयान दर्ज नहीं किया जा सका है।
अधिकारियों के अनुसार, रेड्डी वर्ष 1987 में भारतीय सेना में शामिल हुए थे।
इस साल की शुरुआत में चिंतामणि के तहसीलदार को लिखे पत्र में पूर्व सैनिक ने दो हेक्टेयर जमीन आवंटित करने की मांग की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि 26 वर्षों से लंबित उनके अनुरोध के बावजूद अधिकारियों ने उन्हें जमीन उपलब्ध नहीं कराई।
रेड्डी ने पत्र में लिखा था, ‘‘क्या 26 वर्षों से जमीन मांग रहे एक दिव्यांग पूर्व सैनिक के लिए जमीन की पहचान करना संभव नहीं था?’’
रेड्डी ने कहा था कि उन्होंने भारतीय सेना में सेवा दी है और सवाल किया था कि क्या देश की सेवा करना उनकी गलती थी।
उन्होंने तहसीलदार से आग्रह किया था कि उनके लिए पहले से चिन्हित उपयुक्त जमीन का आवंटन किया जाए।
रेड्डी ने अपने पत्र में यह चेतावनी भी दी थी कि यदि उनकी मांग पर ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य में होने वाली किसी भी ‘‘अप्रिय घटना’’ के लिए अधिकारी जिम्मेदार होंगे।
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