कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने मंगलुरु के फिशिंग हार्बर का दौरा किया

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कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने मंगलुरु के फिशिंग हार्बर का दौरा किया

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  • Publish Date - September 19, 2026 / 03:19 PM IST,
    Updated On - September 19, 2026 / 03:19 PM IST

मंगलुरु (कर्नाटक), 19 सितंबर (भाषा) कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने शनिवार सुबह मंगलुरु ‘फिशिंग हार्बर’ का दौरा कर मछली पकड़ने की व्यवस्था का निरीक्षण किया और मछुआरों, मछली विक्रेताओं और व्यापार संगठनों के प्रतिनिधियों की चिंताओं को समझने के लिए उनसे बातचीत की।

‘फिशिंग हार्बर’ एक ऐसा सुरक्षित बंदरगाह या तटीय क्षेत्र होता है, जहां मछुआरे समुद्र से मछली पकड़ने के बाद अपनी नावों को सुरक्षित रूप से खड़ा करते हैं और पकड़ी गई मछलियों को उतारते हैं।

प्रदेश सरकार के मंत्री यू.टी. खादर, स्थानीय नेताओं और ‘साउथ कन्नड़ ट्रॉल बोट फिशरमेन्स एसोसिएशन’ के प्रतिनिधियों के साथ मुख्यमंत्री सुबह करीब पांच बजे हार्बर पहुंचे और जेटी एवं डॉक वाले क्षेत्रों का दौरा किया।

मुख्यमंत्री ने मछुआरों और मछली व्यापारियों के साथ चर्चा की और बाद में एक बड़ी पीकॉक मछली के बारे में भी जानकारी ली।

पत्रकारों से बातचीत में शिवकुमार ने कहा कि वह मछली पकड़ने, उसकी बिक्री करने और व्यापार में लगे लोगों की समस्याएं जानने के लिए यहां आए हैं।

मछुआरा समुदाय के लोगों ने बंदरगाह पर सुविधाओं और आजीविका के मुद्दों से जुड़ी कई मांगें मुख्यमंत्री से कीं।

शिवकुमार ने कहा कि सरकार इन मांगों की समीक्षा करेगी और इनके स्थायी समाधानों की दिशा में काम करेगी। उन्होंने सामान्य व्यापारिक गतिविधियों में आ रही अड़चनों का भी संज्ञान लिया।

मुख्यमंत्री ने दक्षिण कन्नड़ के उपायुक्त और मंगलुरु के पुलिस आयुक्त को इस मामले में एक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश देते हुए कहा कि यदि यह पाया जाता है कि सुरक्षा व्यवस्था के कारण सामान्य हार्बर परिचालनों को अनावश्यक रोका जाता है तो अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

शिवकुमार के इस दौरे से एक दिन पूर्व मंगलुरु में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में कई निर्णय किए गए और इस जिले के विकास को लेकर प्रस्तावों पर चर्चा की गई। इन निर्णयों में समुद्री अध्ययन पर केंद्रित एक विश्वविद्यालय खोलने की योजना शामिल है।

इसके अलावा, कर्नाटक सरकार ने तटीय संपर्क मजबूत करने के लिए एक समुद्री मेट्रो परियोजना सहित यात्री एवं माल वाहक जल परिवहन परियोजना का भी प्रस्ताव किया है।

भाषा सं राजेंद्र

प्रशांत

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