कर्नाटक: कांग्रेस ने आरएसएस से जुड़ी संस्थाओं को ओएनजीसी का सीएसआर कोष दिए जाने पर सवाल उठाए

Ads

कर्नाटक: कांग्रेस ने आरएसएस से जुड़ी संस्थाओं को ओएनजीसी का सीएसआर कोष दिए जाने पर सवाल उठाए

  •  
  • Publish Date - July 20, 2026 / 05:03 PM IST,
    Updated On - July 20, 2026 / 05:03 PM IST

बेंगलुरु, 20 जुलाई (भाषा) कांग्रेस की कर्नाटक इकाई के अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने ओएनजीसी का सीएसआर कोष कथित तौर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ी संस्थाओं को दिए जाने पर सोमवार को सवाल उठाए। उन्होंने सार्वजनिक संसाधनों के इस्तेमाल में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की।

हरिप्रसाद ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि सरकारी कंपनी ओएनजीसी ने पिछले दशक में कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) कोष के तहत 668 करोड़ रुपये आरएसएस से जुड़ी 20 संस्थाओं को दिए हैं। उन्होंने कहा कि यह मामला सार्वजनिक जांच का विषय है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “पिछले एक दशक में ओएनजीसी के सीएसआर कोष का 668 करोड़ रुपया आरएसएस से जुड़ी 20 संस्थाओं को दिए जाने की खबरें हैं।”

उन्होंने कहा कि वित्त पोषण के इस कथित तरीके को “लगातार लगाए जा रहे उन आरोपों” के संदर्भ में देखा जाना चाहिए, जिनके तहत मंदिरों के चढ़ावे और आपदा राहत कोष से लेकर कोविड राहत राशि, सरकारी जमीन और कल्याण कर्नाटक विकास निधि तक विभिन्न सार्वजनिक संसाधनों को संघ परिवार से जुड़े तंत्र तक पहुंचाए जाने का दावा किया गया है।

हरिप्रसाद ने आरएसएस के इस दावे पर सवाल उठाया कि उसे सरकारी फंड नहीं मिलता है। उन्होंने कहा, “फिर भी आरएसएस दावा करता है कि वह सरकारी फंड नहीं लेता है। अगर सार्वजनिक संस्थानों और करदाताओं के पैसे से चलने वाले संसाधनों से आपकी सहयोगी संस्थाओं को फंड मिल रहा है, तो आरएसएस खुद के सरकारी धन का प्राप्तकर्ता न होने का दावा कैसे कर सकता है।”

हरिप्रसाद ने कहा कि बहस अब केवल पंजीकरण के सवाल से आगे बढ़ चुकी है। उन्होंने कहा, “अब मुद्दा सिर्फ पंजीकरण का नहीं है; बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिकों के यह जानने के अधिकार का है कि जनता का पैसा कैसे खर्च हो रहा है।”

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने मामले में संघ से जवाब मांगते हुए कहा, “आरएसएस को अपने वित्त पोषण से जुड़े सवालों का जवाब देने और इस बारे में बात करने से नहीं बचना चाहिए कि एक गैर-पंजीकृत संगठन के लिए ऐसा फंड लेना नैतिक रूप से कितना सही है।”

तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम लिमिटेड (ओएनजीसी) की ओर से हरिप्रसाद के आरोपों पर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

भाषा पारुल अविनाश

अविनाश