बेंगलुरु, 18 जून (भाषा) कर्नाटक विधान परिषद की सात सीटों के लिए बृहस्पतिवार को हो रहे चुनाव में दोपहर एक बजे तक 95.50 प्रतिशत मतदान हुआ, जिसके तहत कुल 222 विधायकों में से 212 ने वोट डाले।
राज्य विधानमंडल के उच्च सदन की सात सीटों के लिए आठ उम्मीदवार मैदान में हैं।
कर्नाटक विधानसभा के सदस्य विधान सौध में मतदान में हिस्सा ले रहे हैं।
निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, मतदान सुबह 9 बजे शुरू हुआ और शाम 4 बजे तक जारी रहेगा। मतगणना शाम 5 बजे शुरू होगी।
चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों में कांग्रेस के थिप्पन्नप्पा कामकनूर, पी. वी. मोहन, बी. के. हरिप्रसाद (प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष), शिवन्ना बी एस, और विनय कार्तिक प्रकाश तथा भाजपा के लिंगराज पाटिल और रघु आर और जद(एस) के गोविंदराजू शामिल हैं।
यह चुनाव कराने की इसलिए जरूरत पड़ी क्योंकि विधान परिषद के सात सदस्यों का कार्यकाल 30 जून को समाप्त होने वाला है। इनमें कांग्रेस के नसीर अहमद, टिप्पन्नाप्पा और बी. के. हरिप्रसाद, भाजपा के एन. नागराजू (एमटीबी), प्रताप एस. नायक के. और सुनील वल्लयापुर तथा जद(एस) के गोविंदराजू शामिल हैं।
बृहस्पतिवार को वोट डालने वाले प्रमुख नेताओं में मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक शामिल हैं।
अधिकारियों ने बताया कि चुनाव जीतने के लिए प्रत्येक उम्मीदवार को कम से कम 28 मतों की जरूरत है। विधानसभा में संख्या बल के आधार पर, कांग्रेस और भाजपा के क्रमशः चार और दो सीटें आसानी से जीतने की संभावना है।
हालांकि, सातवीं सीट के लिए कड़ा मुकाबला है, क्योंकि कांग्रेस और जद(एस) दोनों ने ही उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि यह सीट जीतने के लिए उनके पास जरूरी संख्या बल नहीं है।
‘क्रॉस-वोटिंग’ की आशंका के मद्देनजर कांग्रेस और जद (एस) दोनों ने ही अपने विधायकों को शहर के बाहरी इलाकों में अलग-अलग रिजॉर्ट में ठहराया था।
मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार के कार्यभार संभालने के बाद सत्तारूढ़ कांग्रेस के लिए यह पहला चुनावी मुकाबला है।
शिवकुमार के नेतृत्व में सत्तारूढ़ कांग्रेस, भाजपा से निकाले गए विधायकों और निर्दलीय सदस्यों की मदद से सात में से पांच सीटें जीतने की उम्मीद कर रही है।
वहीं, जद(एस) अपने सहयोगी दल भाजपा की मदद से एक सीट जीतने की उम्मीद कर रहा है और उसने कांग्रेस समेत अन्य विधायकों से ‘‘अंतरात्मा की आवाज पर वोट’’ देने की अपील की है।
भाजपा से निकाले गए तीन विधायकों में से दो – एस टी सोमशेखर और शिवराम हेब्बार – ने कहा कि उन्होंने अपनी अंतरात्मा की आवाज पर वोट दिया है।
संवाददाताओं से बात करते हुए उन्होंने कहा कि न तो भाजपा और न ही जद(एस) ने वोट मांगने के लिए उनसे संपर्क किया, जबकि मुख्यमंत्री शिवकुमार ने उनसे संपर्क किया और कांग्रेस उम्मीदवार के लिए समर्थन मांगा।
सोमशेखर और हेब्बार बुधवार को उस रिजॉर्ट में नजर आये, जहां कांग्रेस विधायक डेरा डाले हुए थे। बृहस्पतिवार को भी वे कांग्रेस विधायकों के साथ देखे गए और शिवकुमार से भी मिले।
हालांकि, भाजपा से निकाले गए एक और सदस्य बासनगौड़ा पाटिल यतनाल ने कहा कि उन्होंने पार्टी के निर्देशों के अनुसार वोट दिया, क्योंकि वह इसी पार्टी के चुनाव चिह्न पर विधानसभा चुनाव जीते थे। उन्होंने विपक्ष के नेता आर. अशोक से भी मुलाकात की।
इस बीच, जद(एस) के वरिष्ठ विधायक जी.टी. देवेगौड़ा, जो कुछ समय से पार्टी से दूरी बनाये हुए हैं, ने अलग से वोट डाला और पार्टी के दूसरे विधायकों के साथ मतदान करने के लिए नहीं आए, जिस कारण अटकलें शुरू हो गईं।
देवेगौड़ा ने पत्रकारों से कहा कि उन्होंने अपनी ‘‘अंतरात्मा’’ की आवाज पर वोट दिया।
भाषा सुभाष पवनेश
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