नयी दिल्ली, 18 जून (भाषा) कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर ‘जी-7’ शिखर सम्मेलन के दौरान भारतीय हितों को लेकर चुप्पी साधने का आरोप लगाया और कहा कि उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ अपनी ‘‘मित्रता’’ को भारत के राष्ट्रीय हितों से ऊपर नहीं रखना चाहिए।
पार्टी के विदेश विभाग के प्रमुख सलमान खुर्शीद ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा सरकार यह याद रखेंगे कि द्विपक्षीय संबंध व्यक्तियों के बीच नहीं, बल्कि देशों के बीच होते हैं।
खुर्शीद ने एक बयान में कहा, ‘‘कांग्रेस को आशा थी कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी फ्रांस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन का उपयोग ‘ग्लोबल साउथ’ में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका को दृढ़ता से स्थापित करने तथा भारत की ऊर्जा संप्रभुता, आर्थिक हितों और रणनीतिक स्वायत्तता का मुखरता से बचाव करने के अवसर के रूप में करेंगे।’’
उन्होंने कहा कि इस शिखर सम्मेलन ने सरकार के दावों और वास्तविक उपलब्धियों के बीच एक चिंताजनक अंतर को उजागर किया है।
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘राष्ट्रपति ट्रंप के साथ ‘‘घनिष्ठ मित्रता’’ के दावों के विपरीत, प्रधानमंत्री मोदी न तो भारत की ऊर्जा संप्रभुता की रक्षा करते हुए स्पष्ट और दृढ़ रुख अपना सके और न ही अमेरिकी विदेशी संपदा नियंत्रण कार्यालय (ओएफएसी) से प्रतिबंधों में ऐसी छूट हासिल कर सके, जिससे रूस से तेल का आयात जारी रखा जा सकता हो।’’
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान संघर्षविराम कराने का श्रेय लिए जाने के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी का रहस्यमय ढंग से मौन रहना भी गंभीर चिंता का विषय है।
खुर्शीद ने दावा किया, ‘‘इस मौन की केवल दो ही व्याख्याएं हो सकती हैं। या तो उन्होंने राष्ट्रपति के दावे को मौन स्वीकृति दे दी या फिर सार्वजनिक रूप से उसका खंडन करने की इच्छा नहीं दिखाई। इससे भारत की उस दीर्घकालिक विदेश नीति को भी आघात पहुंचता है, जिसके अनुसार द्विपक्षीय मामलों में किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार नहीं की जाती।’’
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘अमेरिकी राष्ट्रपति के प्रधानमंत्री मोदी के साथ ‘‘मित्रता’’ के सार्वजनिक दावों के समानांतर लगातार भारत-विरोधी कदम और बयान सामने आए हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी को अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ अपनी ‘‘मित्रता’’ को भारत के राष्ट्रीय हितों से ऊपर नहीं रखना चाहिए। हमें आशा है कि प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा सरकार यह याद रखेंगे कि द्विपक्षीय संबंध व्यक्तियों के बीच नहीं, बल्कि देशों के बीच होते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए, चाहे व्हाइट हाउस में कोई भी हो या भारत सरकार में में कोई भी हो, भारत के राष्ट्रीय हित सदैव सर्वोपरि रहने चाहिए।’’
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