तिरुवनंतपुरम, आठ अक्टूबर (भाषा) केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) ने बुधवार को विधानसभा में घोषणा की कि वह सदन की कार्यवाही में तब तक सहयोग नहीं करेगा जब तक कि सबरीमला मंदिर में ‘द्वारपालक’ की मूर्तियों पर चढ़ी सोने की परत के कम वजन से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर देवस्वओम मंत्री इस्तीफा नहीं दे देते।
यूडीएफ के नेताओं ने लगातार तीसरे दिन भी प्रश्नकाल के दौरान नारे लगाते हुए तख्तियों और बैनर के साथ आसन के समक्ष विरोध प्रदर्शन किया।
जैसे ही सत्र शुरू हुआ, विपक्ष के नेता वी डी सतीशन ने आरोप लगाया कि भगवान अयप्पा मंदिर की द्वारपालक मूर्तियों को ले जाया गया और बाहर बेच दिया गया।
उन्होंने कहा, ‘‘हम तब तक सदन की कार्यवाही में सहयोग नहीं करेंगे, जब तक कि देवस्वओम मंत्री वी एन वासवन इस्तीफा नहीं दे देते और त्रावणकोर देवस्वओम बोर्ड के सदस्यों को बाहर नहीं कर दिया जाता।’’
संसदीय कार्य मंत्री एम बी राजेश ने विपक्ष के रुख पर सवाल उठाया और जानना चाहा कि वे इस मामले पर चर्चा के लिए नोटिस देने का ‘‘साहस’’ क्यों नहीं दिखा रहे हैं।
गौरतलब है कि केरल उच्च न्यायालय ने सबरीमला में द्वारपालक (संरक्षक देवता) की मूर्तियों पर सोने की परत चढ़ी तांबे की प्लेट के कम वजन से संबंधित कथित अनियमितताओं की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन का सोमवार को निर्देश दिया। वजन में कमी का मामला इस वर्ष उच्च न्यायालय को सूचित किए बिना मूर्ति की बाहरी परत को पुनः स्वर्ण-लेपन के लिए भेजने के निर्णय पर अदालती कार्यवाही के दौरान प्रकाश में आया।
सुनवाई के दौरान यह पाया गया कि पिछली बार जब 2019 में सोने की परत चढ़ाने के लिए मंदिर से तांबे की प्लेटों को निकाला गया था, तो उनका (सोने से मढ़ी प्लेटों का) वजन लगभग 4.5 किलोग्राम कम हो गया था। यह एक ऐसा तथ्य है जिसकी जानकारी देवस्वोम अधिकारियों ने नहीं दी।
पिछले हफ्ते अदालत ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश के टी शंकरन की देखरेख में सबरीमला मंदिर में सोने सहित सभी कीमती वस्तुओं की एक व्यापक सूची बनाने का आदेश दिया था।
भाषा गोला सिम्मी
सिम्मी