केरल सरकार आपदा प्रबंधन और उससे निपटने के लिए प्रभावी प्रणाली लाएगी: मुख्यमंत्री सतीशन

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केरल सरकार आपदा प्रबंधन और उससे निपटने के लिए प्रभावी प्रणाली लाएगी: मुख्यमंत्री सतीशन

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  • Publish Date - August 4, 2026 / 07:08 PM IST,
    Updated On - August 4, 2026 / 07:08 PM IST

पत्तनमथिट्ठा (केरल), चार अगस्त (भाषा) केरल के मुख्यमंत्री वी डी सतीशन ने मंगलवार को जिले के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया और हाल ही में हुई भारी बारिश के कारण जिन घरों में पानी भर गया है, उनके लिए 10,000 रुपये की वित्तीय सहायता देने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि सरकार अचानक बदलने वाले मौसम की सटीक जानकारी देने और आपदाओं से निपटने की क्षमता को मजबूत करने के लिए एक नया तंत्र (आपदा प्रबंधन प्रणाली) स्थापित करने पर विचार कर रही है।

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘बारिश के कारण जिन लोगों के घरों में पानी भर गया है, उन्हें सरकार वित्तीय सहायता के रूप में 10,000 रुपये प्रदान करेगी।’

सतीशन ने बताया कि यह नया आपदा प्रबंधन तंत्र विशेषज्ञ एजेंसियों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के सहयोग से विकसित किया जाएगा जो पूर्व चेतावनी प्रणाली के रूप में काम करेगा।

उन्होंने कहा कि राज्य में मानव चालित और एआई-सक्षम, दोनों तरह के अधिक वर्षामापी तंत्र लगाए जाएंगे। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में काम कर रही ‘ह्यूम सेंटर फॉर इकोलॉजी एंड वाइल्डलाइफ बायोलॉजी’ और ‘कोचीन यूनिवर्सिटी’ जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं की विशेषज्ञता का उपयोग किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि इस प्रभावी मौसम पूर्वानुमान और पूर्व चेतावनी प्रणाली को प्रायोगिक तौर पर सबसे पहले पत्तनमथिट्ठा जिले में लागू किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बादल फटने या अत्यधिक भारी बारिश की घटनाएं बिना किसी पूर्व चेतावनी के हो जाती हैं, जिससे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए बहुत कम समय मिल पाता है।

उन्होंने बताया कि बहुत कम समय में अत्यधिक भारी बारिश हो रही है। आमतौर पर 200 मिमी से अधिक बारिश को ‘अत्यधिक भारी बारिश’ माना जाता है, लेकिन इस बार कुछ स्थानों पर 340 मिमी तक बारिश दर्ज की गई है।

सतीशन ने कहा कि कई स्थानों पर बाढ़ का एक मुख्य कारण भूस्खलन और जंगलों के भीतर मिट्टी का धंसना है।

उन्होंने पुष्टि की कि भारी बारिश के बाद से सात लोग अब भी लापता हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रस्तावित आपदा प्रबंधन प्रणाली, जो देश में सबसे प्रभावी होगी, जंगलों के भीतर भूस्खलन सहित सभी पहलुओं की जांच के बाद शुरू की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने बाढ़ का मुख्य कारण नदियों के तल में गाद का जमा होना बताया और आरोप लगाया कि वर्ष 2019 के बाद से नदियों से गाद निकालने का काम नहीं किया गया है।

उन्होंने कहा कि हाल ही में आई बाढ़ से नदियों में और मलबा जमा होगा, जिससे उनकी जल-धारण क्षमता कम हो जाएगी और सामान्य बारिश में भी जलजमाव होगा।

सतीशन ने कहा कि सरकार अगली बाढ़ का इंतजार नहीं करेगी और पत्तनमथिट्ठा जिले के तिरुवल्ला, रन्नी और आरणमुला जैसे गंभीर रूप से प्रभावित क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हुए पूरे राज्य में नदियों से गाद निकालने के लिए त्वरित कदम उठाए जाएंगे।

भाषा सुमित नरेश

नरेश