तिरुवनंतपुरम, पांच जुलाई (भाषा) केरल के मंत्री के. मुरलीधरन ने रविवार को स्वास्थ्य विभाग द्वारा पिछले 10 वर्षों में की गई बड़ी खरीदारी की विभागीय जांच के आदेश दिए।
यह निर्णय इस रिपोर्ट के बाद लिया गया कि महंगे चिकित्सा उपकरण अस्पतालों एवं चिकित्सा महाविद्यालयों में बिना किसी उपयोग के पड़े हुए हैं।
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मुरलीधरन ने कहा कि इस जांच के दायरे में योजना निधि और प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना निधि से की गई खरीदारी के साथ-साथ कोविड-19 महामारी के दौरान केंद्र की ओर से उपलब्ध कराये गये चिकित्सा उपकरण भी शामिल होंगे।
एक बयान में उन्होंने कहा कि सरकार को इस संबंध में शिकायत भी मिली थी तथा हाल में जब वह वायनाड चिकित्सा महाविद्यालय गये थे तब भी उन्हें वहां करोड़ों रुपये के उपकरण एक गोदाम में बिना इस्तेमाल के पड़े मिले थे, जिनमें ‘मोबाइल मॉर्चरी’ भी शामिल थीं।
मुरलीधरन ने कहा कि ये मशीनें इतने समय से बिना उपयोग के पड़ी हैं कि अब इस बात को लेकर भी संदेह है कि वे अब इस्तेमाल आ भी सकती हैं या नहीं।
उन्होंने कहा कि यह पता लगाना जरूरी है कि जब विभाग को कर्मियों की भर्ती और दवाइयां खरीदने में पैसों की तंगी का सामना करना पड़ रहा था, तब ऐसी खरीदारी क्यों की गई।
मंत्री ने कहा कि इन आरोपों की जांच होनी चाहिए कि कुछ खरीदारी कमीशन कमाने के मकसद से की गई थीं।
हालांकि उन्होंने यह अपील भी की कि इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने बर्बादी के कई उदाहरण दिए, जिनमें तिरुवनंतपुरम मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक के बाहर खुली जगह पर पड़ी एक ‘ऑटोक्लेव मशीन’ भी शामिल है।
उन्होंने यह भी कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान उपलब्ध कराये गये दो ऑक्सीजन सांद्रक तिरुवनंतपुरम के जनरल अस्पताल में बेकार पड़े थे, जबकि सरकार ऑक्सीजन खरीदने पर लाखों रुपये खर्च कर रही थी।
भाषा राजकुमार सुरेश
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