तिरुवनंतपुरम, 18 सितंबर (भाषा) केरलम के मंत्री के. एम. शाजी द्वारा अपनी आधिकारिक गाड़ी के रूप में महंगी ‘रेंज रोवर’ एसयूवी के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।
विपक्ष के एक प्रमुख नेता ने शुक्रवार को उनके उस दावे पर सवाल उठाया, जिसमें उन्होंने कहा था कि यह गाड़ी उनके एक दोस्त की है और इसका इस्तेमाल इसलिए किया गया क्योंकि उन्हें आवंटित सरकारी वाहन लंबी दूरी की यात्रा के ठीक नहीं था।
इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के कद्दावर नेता और स्थानीय स्वशासन विभाग (एलएसजीडी) का प्रभार संभाल रहे शाजी ने कहा है कि वह अपने दोस्त की रेंज रोवर गाड़ी में यात्रा करने के लिए सरकार से एक रुपया भी नहीं लेंगे।
शाजी ने मीडिया से कहा, ‘यह गाड़ी मेरे दोस्त की है। कोई भी इसकी जांच कर सकता है। इस वाहन में यात्रा करने के लिए सरकार से एक भी रुपया लेने का मेरा कोई इरादा नहीं है।’
उन्होंने कहा कि उन्हें अपने दोस्त की गाड़ी का इस्तेमाल इसलिए करने को मजबूर होना पड़ा क्योंकि सरकार द्वारा प्रदान किया गया वाहन लंबी दूरी के सफर के लायक नहीं था।
मंत्री ने कहा, ‘सरकार द्वारा मुझे दी गई गाड़ी तिरुवनंतपुरम से अन्य स्थानों की यात्रा करने में सक्षम नहीं है। यह काफी इस्तेमाल की जा चुकी गाड़ी है और लगभग चार लाख किलोमीटर चल चुकी है। इसलिए मैंने स्थानीय यात्राओं के लिए अपने दोस्त की गाड़ी का इस्तेमाल किया।’
उन्होंने कहा, ‘मुझे इसके लिए न तो डीजल मिलता है और न ही तय की गई दूरी का पैसा मिलता है। वास्तव में यह मेरे लिए नुकसान ही है।’
केरलम के पूर्व मंत्री और वामपंथी नेता के. टी. जलील ने आधिकारिक वाहन के रूप में दोस्त की रेंज रोवर के इस्तेमाल को लेकर शाजी पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने इस व्यवस्था को ‘पद की शपथ का उल्लंघन’ करार दिया और कहा कि यह वी. डी. सतीशन के नेतृत्व वाली सरकार के लिए ‘शर्म की बात’ है।
शाजी के इस स्पष्टीकरण पर कि सरकारी कार लंबी दूरी के सफर के अनुकूल नहीं थी, जलील ने एक फेसबुक पोस्ट में कहा कि मुख्यमंत्री और पर्यटन मंत्री को हस्तक्षेप करना चाहिए तथा शाजी को किसी निजी वाहन पर निर्भर रहने देने के बजाय नयी सरकारी ‘इनोवा क्रिस्टा’ प्रदान करनी चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘सतीशन सरकार के एक मंत्री को मांगी हुई कार में यात्रा करनी पड़ रही है, यह बात शर्मनाक है।’
दोस्त की महंगी गाड़ी का इस्तेमाल करने के नैतिक पहलुओं पर सवाल उठाते हुए जलील ने कहा, ‘स्वाभाविक रूप से, एक इंसान के नाते, गाड़ी देने वाले दोस्त के प्रति उनके मन में विशेष लगाव हो सकता है। लेकिन क्या यह शपथ लेते समय कहे गए उन शब्दों के विपरीत नहीं होगा कि वह किसी के भी प्रति बिना किसी विशेष पक्षपात (मेहरबानी) या पूर्वाग्रह के काम करेंगे?’
उधर, शाजी ने कहा कि इस वाहन पर आधिकारिक नंबर प्लेट सरकारी अनुमति से ही लगाई गई थी।
उन्होंने कहा कि वाहन मालिक की पृष्ठभूमि की जांच कोई भी कर सकता है।
भाषा सुमित नरेश
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