कोच्चि, 17 मार्च (भाषा) केरल उच्च न्यायालय ने साक्ष्य से छेड़छाड़ के मामले में राज्य के पूर्व परिवहन मंत्री एंटनी राजू की दोषसिद्धि पर रोक लगाने संबंधी याचिका खारिज कर दी।
राजू ने यह याचिका इसलिए दायर की थी ताकि वह आगामी विधानसभा चुनाव लड़ सकें।
न्यायमूर्ति सी. जयचंद्रन ने केरल में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेतृत्व वाले वामपंथी लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के घटक दल जनाधिपत्य केरल कांग्रेस के नेता राजू द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। विस्तृत आदेश की प्रतीक्षा है।
उन्हें 1990 में मादक पदार्थ मामले में गिरफ्तार एक ऑस्ट्रेलियाई नागरिक के वकील के रूप में पेश होते समय सबूतों से छेड़छाड़ करने से संबंधित मामले में नेदुमंगड स्थित न्यायिक प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट-1 न्यायालय द्वारा तीन साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई गई थी।
उनकी दोषसिद्धि के बाद केरल विधानसभा सचिवालय ने एक अधिसूचना जारी कर विधायक के रूप में उनकी अयोग्यता की पुष्टि की।
राजू तिरुवनंतपुरम केंद्रीय विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते थे।
उच्च न्यायालय में अपनी याचिका में राजू ने कहा है कि दोषसिद्धि को निलंबित करने के लिए आवेदन इसलिए दायर किया गया था क्योंकि केरल विधानसभा के एक मौजूदा सदस्य के रूप में वह केवल दोषसिद्धि के कारण अयोग्य घोषित कर दिए गए थे।
राजू के अनुसार, जब तक दोषसिद्धि को निलंबित न कर दिया जाए, कारावास की सजा के विपरीत लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 8(3) के तहत अयोग्यता स्वतः प्रभावी और तत्काल होती है जिससे मुआवजे की कोई गुंजाइश नहीं रहती।
अपनी याचिका में उन्होंने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता का राज्य की विधानसभा के आगामी आम चुनाव में चुनाव लड़ने का अधिकार, आपराधिक अपील में चुनौती दिए गए निर्णय के माध्यम से उस पर लगाई गई सजा के कारण खतरे में पड़ गया है, जो तथ्य और कानून – दोनों के आधार पर बचाव योग्य नहीं है।’’
उन्होंने यह भी तर्क दिया था कि मजिस्ट्रेट की अदालत द्वारा दी गई सजा और फैसला कानून, तथ्यों और सबूतों के खिलाफ था और आरोप लगाया था कि अदालत ने सबूतों के मूल्यांकन में गंभीर त्रुटियां की हैं।
भाषा सुरभि नरेश
नरेश