केरल : महिला विधायक ने ऑनलाइन चैनल को निजता के उल्लंघन के खिलाफ आगाह किया
केरल : महिला विधायक ने ऑनलाइन चैनल को निजता के उल्लंघन के खिलाफ आगाह किया
तिरुवनंतपुरम, 16 जून (भाषा) इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) की विधायक फातिमा तहलिया ने मंगलवार को ऑनलाइन मीडिया चैनल को चेतावनी दी कि वे उनके “पैपराजी स्टाइल” के वीडियो बनाने और निजता का उल्लंघन करने से बचें। उन्होंने कहा कि ऐसे कृत्य पीछा करने या तंग करने की श्रेणी में आ सकते हैं, जिनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
केरल के पेराम्बरा से पहली बार विधायक चुनी गई फातिमा ने अपने फेसबुक पोस्ट में कहा कि जनप्रतिनिधि होने के नाते सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल होना उनकी जिम्मेदारी है, लेकिन हाल के समय में एक प्रवृत्ति बढ़ रही है, जिसमें कुछ लोग मीडिया के नाम पर कार्यक्रमों में प्रवेश करते हैं और बिना किसी उचित अनुमति या पहचान के वीडियो बनाते हैं।
उन्होंने कहा, “आयोजक आमतौर पर कार्यक्रमों के लिए आधिकारिक फोटोग्राफर और वीडियोग्राफर नियुक्त करते हैं। हालांकि, कुछ मामलों में लोग सिर्फ सोशल मीडिया पोस्टर के आधार पर खुद को मीडिया कर्मी बताकर कार्यक्रमों में प्रवेश कर लेते हैं, जबकि उनके पास कोई पहचान पत्र या आधिकारिक दस्तावेज नहीं होता।”
फातिमा के मुताबिक, आयोजकों के लिए अधिकृत रूप से नियुक्त लोगों और बिना अनुमति के पहुंचने वालों के बीच अंतर करना अक्सर मुश्किल होता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग ऐसी परिस्थितियों का दुरुपयोग करते हुए निजी बातचीत, सामान्य संवाद तथा व्यक्तिगत पलों को रिकॉर्ड कर लेते हैं और बाद में जनता को गुमराह करने के लिए उन्हें तोड़-मरोड़कर पेश करते हैं।
फातिमा के अनुसार, सार्वजनिक जगहों पर भी हर व्यक्ति को निजता का अधिकार होता है। उन्होंने कहा कि बिना किसी नियम-कायदे का पालन किए मोबाइल फोन लेकर निजी जगहों में घुसकर वीडियो रिकॉर्ड करना स्वीकार्य नहीं है।
फातिमा ने कहा, “यह केवल मेरी निजता का उल्लंघन नहीं है, बल्कि मेरे साथ मौजूद अन्य लोगों की निजता का भी उल्लंघन है।”
आईयूएमएल विधायक की यह टिप्पणी पिछले हफ्ते मलयालम अभिनेता सलीम कुमार के अंतिम संस्कार के दौरान कुछ ऑनलाइन मीडिया चैनल के व्यवहार को लेकर जारी आलोचनाओं के बीच आई है।
मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने भी सलीम के अंतिम संस्कार के दौरान ऑनलाइन मीडिया चैनल के व्यवहार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि इस समस्या का समाधान केवल कानून बनाकर नहीं किया जा सकता और मीडिया संगठनों को अधिक जिम्मेदारी से काम करने की जरूरत है।
भाषा तान्या पारुल
पारुल

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