केरल के देवस्वओम मंत्री ने मंदिर मामलों में अदालत के ‘अनावश्यक दखल’ पर सवाल उठाए
केरल के देवस्वओम मंत्री ने मंदिर मामलों में अदालत के ‘अनावश्यक दखल’ पर सवाल उठाए
त्रिशूर (केरल),12 जुलाई (भाषा) केरल के देवस्वओम मंत्री के. मुरलीधरन ने रविवार को शबरिमला मंदिर के मामलों में केरल उच्च न्यायालय के “अत्यधिक दखल” की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि अदालत यह भी तय कर रही है कि पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर में कौन से फूल इस्तेमाल किए जाने चाहिए।
यहां एक कार्यक्रम में मुरलीधरन ने कहा कि इस बात की जांच करने की जरूरत है कि क्या मंदिरों के कामकाज में इस स्तर का न्यायिक हस्तक्षेप उचित है?
उन्होंने कहा, “सब कुछ अदालत तय कर रही है। शबरिमला में न तो भक्तों की और न ही सरकार की कोई भूमिका है। उच्च न्यायालय यह भी तय करता है कि कौन से फूल इस्तेमाल किए जाएं और वहां कतार कैसी हो।”
मंत्री ने कहा कि उन्होंने यह मुद्दा पहले ही विधानसभा में उठाया था, जहां वह अदालत की अवमानना की कार्रवाई के डर के बिना खुलकर बोल सकते थे।
उन्होंने कहा, “जब हम बाहर बोलते हैं, तो अवमानना के सवाल उठते हैं। अब यह सोचने का समय आ गया है कि क्या मंदिर के मामलों में इतना ज्यादा दखल होना चाहिए।”
इस महीने की शुरुआत में, मुरलीधरन ने विधानसभा में कहा था कि शबरिमला मंदिर के प्रशासन से जुड़े अहम फैसले उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार लिए जाते हैं, और राज्य सरकार व टीडीबी अदालती आदेशों के मुताबिक काम करते हैं।
विधानसभा में सवालों का जवाब देते हुए मंत्री ने कहा था कि कई मामलों में उच्च न्यायालय के निर्देश त्रावणकोर देवस्वओम बोर्ड (टीडीबी) और राज्य सरकार के फैसलों के उलट रहे हैं।
उन्होंने कहा था, “यहां तक कि शबरिमला में तीर्थयात्री पूजा कैसे करें, इस बारे में भी फैसले उच्च न्यायालय ही लेता है। न तो सरकार और न ही टीडीबी ऐसे मामलों पर फैसला करती है। सब कुछ अदालत के निर्देशों के अनुसार ही किया जाता है।”
मुरलीधरन ने यह भी कहा था कि सरकार न्यायपालिका के सम्मान में ऐसे मुद्दों पर टिप्पणी करने से बचती रही है।
भाषा प्रशांत गोला
गोला

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