राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन नदी के प्रवाह क्षेत्र वाले पांच आर्द्रभूमि का पुनर्जीवन कर रहा

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन नदी के प्रवाह क्षेत्र वाले पांच आर्द्रभूमि का पुनर्जीवन कर रहा

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन नदी के प्रवाह क्षेत्र वाले पांच आर्द्रभूमि का पुनर्जीवन कर रहा
Modified Date: July 12, 2026 / 04:00 pm IST
Published Date: July 12, 2026 4:00 pm IST

(आदित्य देव)

नयी दिल्ली, 12 जुलाई (भाषा) राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) ‘नमामि गंगे’ कार्यक्रम के तहत उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में पांच आर्द्रभूमि का पुनर्जीवन कर रहा है। वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर गंगा बेसिन में चिह्नित अन्य महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि में भी आने वाले समय में संरक्षण का काम शुरू करने की योजना है।

एनएमसीजी के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर की कालेवाला झील, प्रयागराज की नुमैया दह झील (खेदुवा ताल) और बलिया की रेवती दह आर्द्रभूमि, बिहार के भोजपुर जिले की नथमलपुर भगाड़ आर्द्रभूमि तथा झारखंड के साहिबगंज जिला स्थित उधवा झील पक्षी अभयारण्य (रामसर स्थल) में यह कवायद की जा रही है।

इसके अलावा, संरक्षण की पहल का दायरा गंगा बेसिन में मौजूद पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण अन्य आर्द्रभूमियों तक बढ़ाने के तहत, एनएमसीजी ने उत्तराखंड में रामसर स्थल ‘आसन आर्द्रभूमि’ के लिए संरक्षण और प्रबंधन प्रस्ताव तैयार करने में सहयोग किया है।

अधिकारियों ने बताया कि इन आर्द्रभूमि के पुनरुद्धार कार्य के तहत प्राकृतिक जल प्रवाह की कड़ियों को फिर से बहाल करने, आर्द्रभूमि के प्राकृतिक आवास की गुणवत्ता सुधारने, जलीय जैव विविधता के संरक्षण, टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने, स्थानीय समुदायों और अन्य संबंधित पक्षों की भागीदारी बढ़ाने तथा वैज्ञानिक निगरानी और जरूरत के अनुसार प्रबंधन पर ध्यान दिया जा रहा है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘इन आर्द्रभूमि से प्राप्त अनुभव और जानकारी गंगा बेसिन में भविष्य में होने वाले आर्द्रभूमि पुनरुद्धार कार्यों का मार्गदर्शन करेगी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘एनएमसीजी वैज्ञानिक आकलन के आधार पर चिह्नित अन्य महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि को भी चरणबद्ध तरीके से पुनर्जीवन परियोजनाओं में शामिल करने की योजना बना रहा है। इसके लिए संबंधित राज्य सरकारों से अतिरिक्त परियोजना प्रस्ताव मांगे जा रहे हैं, ताकि गंगा बेसिन के अन्य प्राथमिकता वाले आर्द्रभूमि में भी संरक्षण कार्य का विस्तार किया जा सके।’’

अधिकारी ने कहा, ‘‘दीर्घकालिक लक्ष्य पूरे गंगा बेसिन में उपयुक्त बाढ़ क्षेत्र वाली आर्द्रभूमि का ऐसा नेटवर्क विकसित करना है, जो नदी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए, जैव विविधता का संरक्षण करे, जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता बढ़ाए और आर्द्रभूमि पर निर्भर समुदायों की आजीविका को मजबूत करे।’’

एनएमसीजी ने कहा कि देशभर में आर्द्रभूमि के संरक्षण की जिम्मेदारी पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की है, जबकि ‘नमामि गंगे’ कार्यक्रम के तहत वह गंगा नदी और उसकी प्रमुख सहायक नदियों के 10 किलोमीटर के दायरे में स्थित बाढ़ क्षेत्र वाले आर्द्रभूमि के संरक्षण और पुनर्जीवन पर ध्यान देता है।

इसके अनुसार, ये आर्द्रभूमि नदी के प्रवाह को संतुलित रखने, भूजल का पुनर्भरण करने, गाद और प्रदूषकों को रोककर पानी की गुणवत्ता सुधारने, बाढ़ के प्रभाव को कम करने और जलीय जैव विविधता को सहारा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

भाषा शफीक सुभाष

सुभाष


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