उमर अब्दुल्ला ने दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन के लिए मीरवाइज को आमंत्रित करने के फैसले को सही ठहराया
उमर अब्दुल्ला ने दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन के लिए मीरवाइज को आमंत्रित करने के फैसले को सही ठहराया
जम्मू, 12 जुलाई (भाषा) जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने रविवार को नेशनल कॉन्फ्रेंस द्वारा अगले सप्ताह दिल्ली में प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन के लिए हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के मध्यमार्गी नेता मीरवाइज उमर फारूक को आमंत्रित किए जाने के फैसले को सही ठहराया। उन्होंने भाजपा और मीडिया के एक वर्ग पर राज्य का दर्जा बहाल करने की पार्टी की मुहिम से ध्यान भटकाने के लिए जानबूझकर विवाद खड़ा करने का आरोप लगाया।
दिल्ली में 20 जुलाई को प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन से पहले यहां आयोजित ‘दिल्ली चलो’ रैली को संबोधित करते हुए अब्दुल्ला ने आरोप लगाया कि निमंत्रण को लेकर पैदा किया गया विवाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के राजनीतिक कार्यक्रम को कमजोर करने की कोशिश है।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हमने 50 से अधिक लोगों को निमंत्रण भेजा था। उन सभी नामों में से केवल एक नाम चुना गया, जो कश्मीर के एक धर्मगुरु का है। उनके पसंदीदा टीवी चैनलों ने उसी एक निमंत्रण को प्रमुख मुद्दा बना दिया और यह प्रचारित किया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने एक अलगाववादी नेता को दिल्ली बुलाया है।’’
अब्दुल्ला ने भाजपा और मीडिया के एक वर्ग के बयानों में कथित विरोधाभास पर भी सवाल उठाया।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं वर्षों से गृह मंत्री (अमित शाह) को यह कहते सुनता आया हूं कि कश्मीर में अब कोई अलगाववादी नहीं बचा है। भाजपा नेता भी दावा करते हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अलगाववादी सोच खत्म हो चुकी है।’’
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि यह दावा सही है तो जिस व्यक्ति (मीरवाइज) को आमंत्रित किया गया है, उन्हें अलगाववादी बताना विरोधाभासी है।
अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘यदि अलगाववादी सोच वास्तव में खत्म हो चुकी है तो जिस व्यक्ति को हमने बुलाया है, वह अलगाववादी नहीं हो सकता। और यदि वह अलगाववादी है तो इसका मतलब है कि आप कह रहे हैं कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने देश को गुमराह किया। दोनों बातें एक साथ सही नहीं हो सकतीं।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरा विवाद केवल जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने की नेशनल कॉन्फ्रेंस की मांग से लोगों का ध्यान हटाने के लिए खड़ा किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जम्मू में रैली में उमड़ी भारी भीड़ इस बात का प्रमाण है कि लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिशों के बावजूद जम्मू-कश्मीर के लोग राज्य का दर्जा बहाल किए जाने की मांग पर मजबूती से कायम हैं।
भाषा शफीक नेत्रपाल
नेत्रपाल

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