कश्मीर प्रेस क्लब को आवंटित परिसर वापस लेने के बाद प्रशासन बोला-केपीसी का वजूद खत्म
कश्मीर प्रेस क्लब को आवंटित परिसर वापस लेने के बाद प्रशासन बोला-केपीसी का वजूद खत्म
श्रीनगर, 17 जनवरी (भाषा) जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने सोमवार को कहा कि कश्मीर प्रेस क्लब (केपीसी) का अस्तित्व अब खत्म हो गया है। प्रशासन ने कहा कि घाटी स्थित पत्रकारों की सबसे बड़ी संस्था में पिछले हफ्ते की ‘गुटबाजी’ के मद्देनजर केपीसी को आवंटित परिसर वापस ले लिया गया है।
जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करके कहा, ‘‘पत्रकारों के विभिन्न समूहों के बीच असहमति और अप्रिय घटनाओं के बीच यह फैसला किया गया है कि श्रीनगर के पोलो व्यू स्थित कश्मीर प्रेस क्लब को आवंटित परिसर का आवंटन रद्द करके परिसर की भूमि और इस पर निर्मित भवन को एस्टेट विभाग को वापस कर दिया जाए।’’
कश्मीर प्रेस क्लब को शनिवार को तब अनपेक्षित गतिविधियों का सामना करना पड़ा था जब कुछ पत्रकार पुलिस के साथ परिसर में पहुंचे और इसका ‘नया प्रबंधन’ होने का दावा किया। प्रशासन की ओर से एक दिन पहले इसके पंजीकरण को स्थगित करने के बाद इन पत्रकारों ने नए प्रबंधन का दावा किया। पत्रकारों ने मीडिया को बयान जारी किया कि ‘कुछ पत्रकार फोरम’ ने उन्हें नया पदाधिकारी चयनित किया है, लेकिन घाटी के नौ पत्रकार संघों ने इस दावे का विरोध किया था।
सरकार ने कहा कि वह उन अप्रिय घटनाओं के कारण उपजे हालात को लेकर चिंतित है, जिनमें वे दो विरोधी समूह भी शामिल हैं जो कश्मीर प्रेस क्लब के बैनर का इस्तेमाल कर रहे हैं। सरकार ने कहा, ‘‘तथ्यात्मक स्थिति यह है कि पंजीकृत संस्था के रूप में केपीसी का अब वजूद नहीं रहा और इसके प्रबंधकीय निकाय का भी कानूनी रूप से 14 जनवरी, 2021 को अंत हो चुका है। यह वही तारीख है जिस दिन इसका कार्यकाल समाप्त हुआ।’’ सरकार की ओर से कहा गया, ‘‘यह संस्था केंद्रीय पंजीकरण सोसायटी अधिनियम के तहत खुद का पंजीकरण कराने में विफल रही, इसके बाद यह नए प्रबंध निकाय का गठन करने के लिए चुनाव कराने में विफल रही। पूर्ववर्ती क्लब के कुछ लोग कई तरह के अवैध काम कर रहे हैं, जिनमें यह झूठा चित्रण करना शामिल है कि वह एक निकाय के मालिक-प्रबंधक हैं, जिसका कि वैधानिक वजूद ही नहीं है।’’ सरकार ने बताया कि कुछ अन्य सदस्यों ने अंतरिम निकाय का गठन करने के बाद उसी तरह के बैनर का इस्तेमाल करते हुए ‘अधिग्रहण’ का सुझाव दिया। लेकिन सरकार ने कहा कि मूल केपीसी का पंजीकृत निकाय के रूप में अस्तित्व समाप्त हो गया है, इसलिए किसी भी अंतरिम निकाय के गठन का सवाल निरर्थक है। इन परिस्थितियों में तत्कालीन कश्मीर प्रेस क्लब के अधिकार का उपयोग करके किसी भी समूह द्वारा नोटिस जारी करना या संपर्क करना अवैध है।
सरकार की ओर से कहा गया, ‘विवाद और सोशल मीडिया रिपोर्टों के मद्देनजर कानून-व्यवस्था की स्थिति की ओर संकेत करने वाले अन्य स्रोतों के आधार पर हस्तक्षेप करना जरूरी हो गया। इसमें वास्तविक पत्रकारों की सुरक्षा का खतरा और शांति भंग होने का खतरा शमिल है।’ सरकार ने कहा कि वह एक स्वतंत्र और निष्पक्ष प्रेस के लिए प्रतिबद्ध है और मानती है कि पत्रकार पेशेवर, शैक्षिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, मनोरंजक और कल्याणकारी गतिविधियों के लिए जरूरी जगह हासिल करने समेत सभी तरह की सुविधाओं के हकदार हैं। सरकार ने उम्मीद जताई कि सभी पत्रकारों के लिए एक पंजीकृत वास्तविक सोसायटी का जल्द गठन किया जाएगा जो परिसर के पुन:आवंटन के लिए सरकार से संपर्क करने में सक्षम होगी।
पूर्व मुख्यमंत्रियों उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती की ओर से केपीसी के अंदर सशस्त्र पुलिस बल की तस्वीरें ट्वीटर समेत अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित किए जाने के बाद से जम्मू-कश्मीर प्रशासन की कड़ी आलोचना हो रही है। एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने अपने बयान में इस घटना को एक ‘तख्तापलट’ करा दिया। बयान में कहा गया कि पुलिस की मदद से केंद्रशासित प्रदेश में प्रेस की स्वतंत्रता का दमन एक अनवरत जारी रहने वाली प्रवृत्ति है जो शर्मनाक और गैरकानूनी है।
दिल्ली स्थित एक सामाजिक संगठन ‘जनहस्तक्षेप’ ने बयान जारी करके कहा कि कश्मीर के पत्रकारों ने इस अधिग्रहण की घोर निंदा करते हुए यथास्थिति बहाल करने की मांग की है। संगठन ने अपने बयान में अन्य मीडिया गिल्ड और संघों से अनुरोध किया कि वह केंद्र सरकार के तत्वावधान में कश्मीर में चल रहे दमन और देशभर में स्वतंत्र विचारधारा वाले पत्रकारों पर बढ़ते हमलों के खिलाफ संघर्ष करने के लिए एकजुट हो जाएं।
भाषा संतोष नरेश
नरेश

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