कुकी-जो संगठन ने स्थायी समाधान के लिए केंद्र से वार्ता प्रक्रिया में तेजी लाने का आग्रह किया

कुकी-जो संगठन ने स्थायी समाधान के लिए केंद्र से वार्ता प्रक्रिया में तेजी लाने का आग्रह किया

कुकी-जो संगठन ने स्थायी समाधान के लिए केंद्र से वार्ता प्रक्रिया में तेजी लाने का आग्रह किया
Modified Date: July 13, 2026 / 10:29 pm IST
Published Date: July 13, 2026 10:29 pm IST

नयी दिल्ली, 13 जुलाई (भाषा) मणिपुर के एक कुकी-जो संगठन ने सोमवार को दावा किया कि इस साल मार्च से उग्रवादी गुटों ने आदिवासी समुदायों के कम से कम 15 सदस्यों की हत्या की है और 14 गांवों में लगभग 55 घरों को आग के हवाले कर दिया।

संगठन ने केंद्र सरकार से इन घटनाओं की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और मणिपुर संघर्ष का राजनीतिक समाधान जल्द से जल्द निकालने की मांग की है।

एक बयान में, संगठन ने यह भी कहा कि कुकी-जो इलाकों में स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं तक पहुंच पर रोक और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में रुकावट की वजह से मानवीय सहायता की स्थिति और खराब हो गई है, और उसने कानून के तहत समान सुरक्षा की मांग की।

कुकी-जो परिषद (केजेडसी), जो विभिन्न कुकी-जो आदिवासी समुदायों का प्रतिनिधित्व करने वाला एक सामाजिक-राजनीतिक संगठन है, ने कहा कि मार्च 2026 से हिंसा की घटनाओं में 15 कुकी-जो नागरिकों की जान चली गई है और 14 गांवों में लगभग 55 घर जला दिए गए हैं।

बयान में दावा किया गया है कि नोनी जिले के लेइकोट गांव के लोग 2 जुलाई को उनके घर जलाए जाने के बाद आस-पास के जंगलों में भाग गए, जबकि 8 जुलाई को नंगथुट और खोंगमोल नामक दो और गांवों में भी कथित तौर पर घर जला दिए गए।

संगठन ने कहा कि इन घटनाओं में कथित तौर पर नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालिम (मुइवा) यानी एनएससीएन (मुइवा) और जेलियांगरोंग यूनाइटेड फ्रंट (कामसन गुट) से जुड़े उग्रवादी शामिल हैं।

बयान में कहा गया है कि फरवरी में लिटन सरेखोंग में हुई एक घटना के बाद हिंसा बढ़ गई। इसमें दावा किया गया कि कुकी-जो समुदाय की ओर से पारंपरिक तरीकों से विवाद सुलझाने की कोशिशें नाकाम रहीं।

मार्च में पांच कुकी-जो लोगों का अपहरण होने का जिक्र करते हुए काउंसिल ने कहा कि कुकी-जो ग्रामीणों द्वारा बंधक बनाये गए 21 नगा लोगों को सरकार के दखल के बाद रिहा कर दिया गया, लेकिन अगवा किए गए दो कुकी-जो लोग मृत पाए गए।

परिषद ने मणिपुर-नगा समुदाय के छह बंधकों की हत्या की भी निंदा की और कहा कि दोषियों की पहचान कर उन पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए।

हालांकि, परिषद ने दावा किया कि तीन पादरियों सहित 14 कुकी-जो लोगों की हत्याओं को आधिकारिक तवज्जो या खबरों में जगह नहीं मिली।

बयान में यह भी आरोप लगाया गया कि कांगपोकपी, उखरुल और कामजोंग जिलों के कुछ हिस्सों में रहने वाले कुकी-जो लोगों को मार्ग में रुकावटों के कारण खाने-पीने की चीज़ों, दवाओं और ईंधन की कमी का सामना करना पड़ रहा है।

इसमें दावा किया गया कि प्रभावित इलाकों में पेट्रोल की कीमतें 250 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ गई थीं, जबकि आपूर्ति में रुकावट के कारण रसोई गैस सिलेंडर 5,000 रुपये तक में बेचे जा रहे थे।

परिषद ने विधानसभा के साथ अलग केंद्र शासित प्रदेश की अपनी मांग को दोहराते हुए कहा कि मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था कुकी-जो लोगों की जान, अधिकारों और सम्मान की रक्षा करने में नाकाम रही है।

भाषा सुभाष अविनाश

अविनाश


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